गोगा नवमी पूजन से श्रद्धालुओं को मिलता है मनवांछित फल

By प्रज्ञा पाण्डेय | Aug 20, 2022

आज गोगा नवमी है, जन्माष्टमी के दूसरे दिन गोगा नवमी मनायी जाती है। गोगा राजस्थान के लोक देवता हैं। गोगा नवमी खास इसलिए भी है क्योंकि इसे हिन्दू और मुसलमान दोनों मनाते हैं। तो आइए हम आपको गोगा नवमी के बारे में कुछ खास बातें बताते हैं।

गोगा नवमी को गुग्गा नवमी के नाम से भी जाना जाता है। गोगा नवमी भादो महीने की कृष्ण पक्ष की नवमी को मनाया जाता है। इस साल गोगा नवमी 20 अगस्त को है। इस दिन गोगा देवता की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि गोगा देवता की पूजा करने से सांपों से रक्षा होती है। गोगा देवता को सांपों का देवता भी माना जाता है। गोगा देवता की पूजा रक्षाबंधन से शुरू होकर गोगा नवमी तक चलती है।

इसे भी पढ़ें: गोगा नवमी विशेषः साम्प्रदायिक सद्भाव के प्रतीक माने जाते हैं वीर गोगाजी

जानें गोगा जी के बारे में

गोगाजी को राजस्थान राज्य में लोक देवता के रूप में माना जाता है और लोग उन्हें गोगाजी, गुग्गा वीर, जाहिर वीर, राजा मण्डलिक व जाहर पीर के नाम जानते हैं। यह गोरखनाथ के प्रमुख शिष्यों में से एक थे। राजस्थान के छह सिद्धों में गोगाजी का प्रमुख स्थान है। ऐसा माना जाता है की अगर किसी के घर में सांप निकले तो गोगाजी को कच्चे दूध का छिटा लगा दें इससे सांप बिना नुकसान पहुंचाए चला जाता हैं । जिस घर में गोगा जी की पूजा होती हैं उस घर के लोगो को सांप नहीं काटता है गोगाजी पूरे परिवार की रक्षा करते हैं।

क्यों मनायी जाती है गोगा नवमी 

गोगा नवमी की त्यौहार वाल्मीकि समाज अपने आराध्य देव गोगा देव के जन्मोत्सव के रूप में मनाता है। यह गांव तथा शहरों में परम्परागत भक्ति, श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पूजा श्रावणी पूर्णिमा से प्रारम्भ हो जाती है जो नवमी तक चलती है। 

गोगा नवमी की कथा 

गोगा नवमी से जुड़ी एक कथा है प्रचलित है। ऐसा माना जाता है कि जब गोगा की शादी के लिए राजा मालप की बेटी सुरियल को चुना गया तो राजा ने शादी करने से मना कर दिया। इससे गोगा दुखी हुए और उन्होंने अपने गुरु गोरखनाथ को यह बात बतायी। इस पर गोरखनाथ ने वासुकी नाग को राजा की बेटी पर विष से प्रहार करने को कहा। वासुकी नाग के विष के प्रहार को राजा के वैद्य नहीं तोड़ पाए। इस पर वासुकी वेष बदल कर राजा के पास गए और उनसे गुग्गल मंत्र का जाप करने को कहा। गुग्गल मंत्र के जाप से विष का असर कम हो गया। इसके बाद राजा अपने वचन के अनुसार गोगा देवता से अपनी बेटी की शादी कर दी। 

इसे भी पढ़ें: Gyan Ganga: कंस ने माता देवकी के आठवें पुत्र की गणना के लिए कौन-सा फॉर्मूला लगाया था

गोगा नवमी पर कैसे करें पूजा

गोगा नवमी की पूजा हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाकों में होती है। गोगा नवमी का त्यौहार एक दिन नहीं बल्कि आठ दिन तक मनाया जाता है। इस दिन गोगा देवता के मंदिर में पूजा की जाती है और प्रसाद कराया जाता है। प्रसाद के रूप में रोट और चावल का आटा चढ़ाते हैं। साथ ही गोगा नवमी पर लोग गोगा देवता की कथा सुनते हैं और भजन करते हैं। यही नहीं इस दिन गाने वालों की मंडलियां घर-घर जाकर गोगा का गुणगान करती हैं। 

राजस्थान में गोगा नवमी पर लगता है बड़ा मेला 

राजस्थान में गोगाजी की प्रमुख जगह गोगामेडी हनुमानगढ़ जिले के नोहर में मौजूद हैं और दूसरी जगह ददेवरा चुरू जिले में स्थित हैं। इन दोनों जगहों पर गोगा नवमी के दिन विशाल मेले का आयोजन किया जाता हैं। 

गोगा नवमी के विषय में प्रचलित मान्यताएं 

कई स्थानों पर जन्माष्टमी या नवमी के दिन खेजड़ी के पौधे की पूजा होती है। उसके बाद पौधे को जल में प्रवाहित किया जाता है।

- प्रज्ञा पाण्डेय

प्रमुख खबरें

48 घंटे बाद कहर टूट पड़ेगा, होर्मुज नाकेबंदी पर ट्रंप की ईरान को धमकी

F-15 गिराने के बाद Iran का बड़ा दांव, लापता US Pilot को पकड़ने पर रखा भारी इनाम

Pakistan में Petrol Price से हाहाकार! Sindh में दोगुनी महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता

Pakistan की QAU में Leadership Crisis, छात्रों की डिग्री और प्रोफेसरों की सैलरी अटकी