By अभिनय आकाश | Oct 29, 2026
'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों पर, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह RBI के KYC संशोधन निर्देशों की समीक्षा करेगा, जिन्हें 31 दिसंबर तक लागू किया जाना है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे ग्राहकों के साथ हो रही धोखाधड़ी और उनके खातों में होने वाले संदिग्ध लेन-देन के बारे में नजदीकी पुलिस थानों को सूचित करें। सुप्रीम कोर्ट ने RBI से उन बैंकों की सूची मांगी है, जिन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। साथ ही, कोर्ट ने पीड़ितों को हुए नुकसान की भरपाई के उपाय करने को भी कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "डिजिटल धोखाधड़ी के शिकार लोगों के नुकसान की भरपाई के लिए बैंकों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।" कोर्ट ने यह भी बताया कि भले ही डिजिटल अपराधों में 50 प्रतिशत की कमी आई है, फिर भी इस साल अब तक पीड़ितों को ऐसे अपराधों के कारण 800 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' पर दर्ज शिकायतों की जांच के दौरान, पुलिस को पता चला कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार में रजिस्टर्ड एक बैंक अकाउंट में 12 अक्टूबर को 98,592 रुपये आए थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह रकम उस मामले से जुड़ी है, जिसे 'इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस' (IFSO) यूनिट ने दर्ज किया था। यह मामला जनकपुरी के एक निवासी की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसके साथ 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के जरिए करीब 2.10 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। पुलिस के अनुसार, 23 अक्टूबर को अशोक नगर में डिस्पोजेबल सामान बेचने वाली एक दुकान पर सोनू खान का पता चला। वहां से तीन मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड और चेकबुक बरामद की गईं। पूछताछ में खान ने बताया कि अर्जुन चौधरी ने ही यह दुकान खुलवाने में मदद की थी और बदले में आर्थिक सहायता देकर उसके बैंक अकाउंट्स पर अपना नियंत्रण बना लिया था। अधिकारी ने बताया, बाद में चौधरी को भी पकड़ लिया गया और उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।" पुलिस का कहना है कि पैसों के लेन-देन (मनी ट्रेल) का पता लगाने और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने के लिए आगे की जांच जारी है।