By रेनू तिवारी | May 15, 2026
ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच पुराना तनाव एक बार फिर सतह पर आ गया। ईरान ने कड़े शब्दों में UAE पर निशाना साधते हुए उसे न केवल हमले में 'मददगार' बताया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए उसे सीधे तौर पर 'हमलावर' करार दिया। यह तीखी प्रतिक्रिया तब आई जब UAE के प्रतिनिधि ने तेहरान पर अमीरात को निशाना बनाने का आरोप लगाया था। ईरान के कानूनी और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए तेहरान का पक्ष मजबूती से रखा।
उन्होंने आगे कहा कि जब उसकी आबादी और बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचाया जा रहा हो, तो ईरान चुप नहीं बैठ सकता। हमलावरों के साथ सहयोग करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने UAE से कहा, "हम एक शक्तिशाली और महान देश हैं, जिसका राष्ट्र गौरवशाली है। हम चुपचाप खड़े होकर यह नहीं देख सकते कि हमलावर हमारे लोगों और बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाएँ, खासकर तब जब इसमें हमारे पड़ोसियों में से एक—यानी संयुक्त अरब अमीरात—की भागीदारी और सहयोग हो।"
ग़रीबाबादी के अनुसार, तेहरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पूरी तरह से पालन करते हुए कार्रवाई की और आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया। उन्होंने आगे कहा "हमारे पास UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की सभी सुविधाओं को निशाना बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था; या फिर UAE में मौजूद उन सभी सुविधाओं और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना ज़रूरी था, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका की कोई भूमिका या भागीदारी थी। यह एक युद्ध था, और उस युद्ध में हमने अपने देश की रक्षा की। यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के पूरी तरह अनुरूप थी और आत्मरक्षा के हमारे स्वाभाविक अधिकार के दायरे में थी। UAE एक हमलावर है। आप इन झूठों और खोखले आरोपों के पीछे नहीं छिप सकते। एकमात्र देश जिसे अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों को पूरा करना चाहिए, वह UAE है।
ईरानी अधिकारी ने ज़ोर देकर कहा कि ईरान ने पहले ही UAE सहित क्षेत्रीय देशों को संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल की ओर से संभावित हमलों के बारे में चेतावनी दे दी थी, और उन्हें "हमलावरों" का समर्थन न करने की हिदायत दी थी। उन्होंने कहा कि उनके सीनियर अधिकारी खतरों से पूरी तरह वाकिफ थे, फिर भी उन्होंने चेतावनियों को नज़रअंदाज़ करना ही चुना।
ग़रीबाबादी ने UAE पर ऐसे हमलों में मदद करने का आरोप लगाया, जिनकी वजह से हज़ारों लोगों की जान चली गई। उन्होंने कहा, "आपकी मदद और भागीदारी से, और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के खिलाफ़ हमले में UAE की सीधी संलिप्तता के ज़रिए, हमलावरों ने 130,000 आम नागरिकों के ठिकानों पर हमला किया। 4,000 से ज़्यादा बेकसूर आम नागरिक शहीद हो गए हैं।" उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि UAE झूठी कहानियाँ गढ़कर अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता।
उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को 120 से ज़्यादा डिप्लोमैटिक नोट सौंपे थे, जो कुल मिलाकर 500 से ज़्यादा पन्नों के थे। उन्होंने आगे कहा कि UAE के इलाके से उड़ान भरने वाले हर लड़ाकू विमान का ठीक-ठीक समय और उड़ान का रास्ता रिकॉर्ड किया गया था।
खास बात यह है कि ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी धमकियों के खिलाफ़ एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान किया। BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी हरकतों को "इतिहास के कूड़ेदान" में फेंक देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कमरे में मौजूद कई देशों ने "उसी घिनौनी ज़ोर-ज़बरदस्ती के थोड़े-बहुत अलग-अलग रूप" झेले हैं, और उन्होंने BRICS सदस्यों से अपील की कि वे और भी मज़बूत और एकजुट तरीके से इसका जवाब दें।
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