अनुभवहीन बिलावल भुट्टो के विदेश मंत्री बनने से पाक राजनयिकों के बीच मायूसी का माहौल

By नीरज कुमार दुबे | Apr 29, 2022

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर अली भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो-जरदारी पाकिस्तान के अब तक के सबसे युवा विदेश मंत्री बन गये हैं। लेकिन पाकिस्तान के राजनयिकों और विदेश मामलों के विशेषज्ञों को भय है कि कहीं अनुभवहीन बिलावल भुट्टो पाकिस्तान की बची खुची अंतरराष्ट्रीय साख भी खत्म ना कर दें। हम आपको बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के 33 वर्षीय बेटे बिलावल ने इमरान खान सरकार में विदेश मंत्री रहे शाह महमूद कुरैशी का स्थान लिया है। बिलावल की महिला मित्र माने जाने वालीं हिना रब्बानी खार विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाई गयी हैं। पहले से ही माना जा रहा था कि विदेश मंत्रालय पर बिलावल की नजर है लेकिन कुछ मुद्दे हल होना बाकी रह गये थे इसलिए बिलावल ने अपनी खास माने जाने वाली नेता हिना रब्बानी खार को विदेश मंत्रालय में राज्यमंत्री पद दिलवा दिया और कैबिनेट मंत्री पद रिक्त रखवा कर खुद लंदन चले गये नवाज शरीफ से मुलाकात करने। वहां से आश्वासन पाकर बिलावल इस्लामाबाद लौटे और मंत्री पद की शपथ ली। खास बात यह है कि शाहबाज शरीफ के मंत्रिमंडल को शपथ दिलाने से पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने इंकार कर दिया था लेकिन बिलावल को शपथ दिलाने के लिए वह राजी हो गये थे।

इसे संयोग भी कहा जा सकता है कि जुल्फिकार अली भुट्टो ने भी 1960 के दशक में देश के विदेश मंत्री के रूप में अपने कॅरियर की शुरुआत की थी और उनके नाती ने भी वहीं से शुरुआत की है। देखा जाये तो पाकिस्तान की सरकार में इतनी कम उम्र के किसी व्यक्ति को पहली बार कोई महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया गया है। बिलावल वैसे तो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं लेकिन वह पाकिस्तान नेशनल असेंबली के लिए पहली बार 2018 में निर्वाचित हुए थे। बिलावल ऐसे वक्त में विदेश मंत्री बने हैं जब पाकिस्तान को बेहद नाजुक हालात से गुजरते हुए विदेश नीति को संतुलित बनाकर आगे बढ़ने की जरूरत है। विदेश मंत्री के रूप में बिलावल को जिन मुख्य चुनौतियों से निपटना होगा उनमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा लगाए गए आरोपों की पृष्ठभूमि में अमेरिका से तनावपूर्ण हुए संबंधों को सुधारना और पड़ोसी देश भारत के साथ शांति प्रक्रिया फिर से शुरू करने का रास्ता तलाशना शामिल है।

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लेकिन बिलावल ने पाकिस्तान में अब तक जितनी भी राजनीति की है वह विदेश में रहते हुए ही की है। उनकी परवरिश जिस माहौल में हुई है उसके चलते जनता की दिक्कतों से उनका सीधा वास्ता नहीं है। अपनी मां या नाना की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए वह कदम तो बढ़ा चुके हैं लेकिन उनकी तरह वह जमीनी नेता नहीं हैं। संभ्रांत लोगों से घिरे रहने वाले बिलावल ने अपने लिये विदेश मंत्रालय भी इसीलिए लिया क्योंकि वह जमीनी राजनीति करने से बचते हैं। बिलावल की चाह है कि विदेशों में वह आलीशान जीवन ही बिताएं। ऐसे में पाकिस्तानी विदेश मामलों के विशेषज्ञों को अब भय है कि उनकी अब तक की मेहनत पर कहीं बिलावल का अनुभवहीन होना पानी ना फेर दे। इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान अलग-थलग पड़ा हुआ है और कहीं से कोई आर्थिक मदद नहीं मिल रही। साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय संगठनों की ओर से काली सूची में भी डाल दिया गया है। इन सबका हल बिलावल निकाल पाएंगे या स्थितियां और बिगड़ेंगी, इसको लेकर पाकिस्तान में कयासबाजी का दौर जारी है। जहां तक हिना रब्बानी खार की बात है तो वह पहले भी विदेश राज्य मंत्री रह चुकी हैं लेकिन इस पद पर वह कुछ ही समय टिक पाई थीं।

दूसरी ओर, देखा जाये तो पाकिस्तान की परिवारवादी राजनीति में अगली पीढ़ी ने सत्ता संभालना शुरू कर दिया है। बिलावल भुट्टो पाकिस्तान की नई सरकार में विदेश मंत्री बने हैं तो पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम औरंगजेब सूचना मंत्री बनी हैं। पाकिस्तान में शाहबाज शरीफ की सरकार में परिवारवाद हर जगह हावी दिख रहा है। सभी बड़े नेताओं के बेटे-बेटियों को सरकार में कहीं ना कहीं समायोजित किया गया है। देखना होगा कि यह सरकार क्या नेशनल असेम्बली का शेष कार्यकाल पूरा कर पाती है या फिर मध्यावधि चुनावों का सामना पाकिस्तान को करना पड़ता है।

-नीरज कुमार दुबे

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