Rabindranath Tagore Death Anniversary: जानिए भारत के पहले Nobel Laureate और राष्ट्रगान के रचयिता का महान जीवन

By अनन्या मिश्रा | Aug 07, 2026

आज ही के दिन यानी की 07 अगस्त को रवींद्रनाथ टैगोर का निधन हो गया था। वह राष्ट्रगान 'जन गण मन अधिनायक' के रचयिता थे। रवींद्रनाथ टैगोर एक बहुआयामी प्रतिभा के मालिक थे। उन्होंने साहित्य, कविता, दर्शन, नाटक, संगीत और चित्रकारी समेत कई विधाओं में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर रवींद्रनाथ टैगोर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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बंगाल में हुए फेमस

साल 1980 तक रवींद्रनाथ टैगोर ने कई कविताएं, उपन्यास और कहानियां लिखी थीं। इसको बंगाल के पब्लिशर्स ने पब्लिश किया था। इसके बाद वह बंगाल में काफी फेमस हो गए थे। टैगोर की रचनाओं के कारण से उनको हर कोई जानने लगा था। टैगोर ने अपनी रचनाओं के जरिए समाज की गलत रिवाजों और कुरीतियों के बारे में लोगों को जागरुक किया था।

राष्ट्रगान के रचियता

रवींद्रनाथ टैगोर को राष्ट्रगान के रचयिता के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने भारत के अलावा बांग्लादेश का राष्ट्रगान 'आमार सोनार बांग्ला' की भी रचना की थी। वहीं श्रीलंका के राष्ट्रगान को भी टैगोर की कविता से प्रेरित माना जाता है। टैगोर ने करीब 2,230 गीतों की रचना की थी।

फेमस रचनाएं और सम्मान

टैगोर की कुछ फेमस रचनाएं, 'काबुलीवाला', 'क्षुदिता पश्न', 'हैमांति' और 'मुसलमानिर गोल्पो' हैं। वहीं उनके फेमस उपन्यास 'नौकादुबी', 'चतुरंगा, गोरा', 'जोगजोग' और 'घारे बायर' है। रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखी 'गीतांजलि' नामक कविता ने सबसे ज्यादा उपलब्धि हासिल की है। यह उनकी आखिरी रचना थी। वहीं साल 1913 में उनको नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय थे।

मृत्यु

वहीं 07 अगस्त 1941 को रवींद्रनाथ टैगोर ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था।

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