विश्व हिंदू परिषद की बैठक में जनसंख्या नियंत्रण पर हो सकती है चर्चा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 19, 2020

प्रयागराज। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की सोमवार को यहां माघ मेले में होने जा रही बैठक में जनसंख्या नियंत्रण, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण आदि विषय पर चर्चा होने की संभावना है। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष जिवेश्वर मिश्र ने यहां मेला क्षेत्र में लगे विहिप के शिविर में संवाददाताओं को बताया, “सोमवार को दो सत्रों में यह बैठक होगी जिसमें साधू संत विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे। इनमें जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है।” मिश्र ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर को लेकर माननीय उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद यह केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की प्रथम बैठक है। उन्होंने कहा कि देश में इस समय जो कुछ भी चल रहा है, उसको लेकर भी संत खुले मन से अपने विचार रखेंगे।

उन्होंने बताया कि इस बैठक में राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष श्रीमहंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद जी महाराज, अध्वाचार्य विश्व प्रसन्न तीर्थ, संत समिति के अध्यक्ष अविचलदास जी महाराज, साध्वी ऋतंभरा, गोविंददेव गिरि जी, जीवनमुक्तानंद पुरी, शंकरानंद गिरि सहित बड़ी संख्या में संतों के शामिल होने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती, जगद्गुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि जी महाराज और वैष्णव के चारों संप्रदायों के श्रीमहंत फूलडोल बिहारी दास जी भी शामिल होंगे।

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मिश्र ने बताया कि राम जन्मभूमि न्यास ने अपनी ओर से सरकार से कह दिया है कि अगर सरकार उसी मॉडल (विहिप द्वारा पेश मॉडल) पर मंदिर का निर्माण कराती है तो जितने पत्थर तराशे गए हैं, वह दे दिए जाएंगे। इसके अलावा ट्रस्ट को मंदिर निर्माण का खर्च भी हिंदू समाज से एकत्र कर दे दिया जाएगा। मिश्र ने कहा कि आगामी चैत्र नवरात्रि में देशभर में रामोत्सव मनाया जाएगा जिसकी चर्चा इस मार्गदर्शक मंडल में साधू संत करेंगे। जिन ढाई लाख गांवों में रामशिला का पूजन किया गया है, उन सभी गांवों में रामोत्सव मनाने का आह्वान साधु संत अपने भक्तों से करेंगे। मार्गदर्शक मंडल के 300 से अधिक साधू संत सदस्य हैं और राम जन्मभूमि को लेकर आए फैसले के बाद यह पहली बैठक है, इसलिए इसमें ज्यादातर संतो के आने की संभावना है।

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