पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर सरकारी दलील से असंतुष्ट हाई कोर्ट ने चार सप्ताह का और समय दिया

By दिनेश शुक्ल | Aug 18, 2020

जबलपुर। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने वाले निर्णय पर हाई कोर्ट ने रोक बरकार रखी है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए इसे चार सप्ताह के लिए टाल दिया। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य में पिछडा वर्ग को सरकारी नौकरियों में आरक्षण 27 फीसदी आरक्षण नहीं मिल पाएगा। पिछड़ा को दिए राज्य सरकार द्वारा दिए गए 27 प्रतिशत आरक्षण की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार की तरफ से आरक्षण को लेकर पेश किए गए जवाब न्याय संगत नहीं हैं। इससे पहले इसी मामले पर बीते 20 जुलाई को कोर्ट में सुनवाई की थी। जिसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को 18 अगस्त को जवाब देने के लिए कहा था जिस पर आज सुनवाई हुई।

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अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर मंगलवार को राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि मध्य प्रदेश में 50 फीसदी से ज्यादा ओबीसी की आबादी है। साथ ही ओबीसी की बड़ी आबादी राज्य में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ेपन का शिकार है। इसलिए आरक्षण देना जरूरी है। जिस पर इस आरक्षण के विरोधी याचिकार्ताओं ने अपत्ति जताई। याचिकार्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता है और न ही ऐसा करके अनारक्षित वर्ग के खिलाफ अन्याय किया जा सकता है। गौरतलब है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी के मद्देनजर शासकीय सेवाओं में ओबीसी को दिया जाने वाला आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 फीसदी करने को चुनौती देने वाली अब तक 11 याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर हो गई हैं।

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