शिवरात्रि के दिन भूलकर भी न करें ये काम, इन चीजों को चढ़ाने से नाराज हो सकते हैं भोले शंकर

By अनन्या मिश्रा | Feb 17, 2023

इस साल महाशिवरात्री का पर्व 18 फरवरी को मनाया जाएगा। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शंकर का व्रत रखना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह हुआ था। लेकिन सही जानकारी न होने के कारण महाशिवरात्रि के दिन भक्त कई ऐसी गलतियां करते हैं। जिससे प्रसन्न होने के स्थान पर भोलेनाथ बेहद नाराज हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि ऐसे कौन सी गलतियां  हैं जो हमें महाशिवरात्रि के दिन भूलकर भी नहीं करने चाहिए। 

महाशिवरात्रि के दिन व्यक्ति को सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाना चाहिए और फिर इसके बाद पूजा पाठ करनी चाहिए। पूजा के बाद ही कुछ भी खाना चाहिए। वहीं अगर हो सके तो व्यक्ति को इस दिन व्रत भी रहना चाहिए।

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इसके अलवा महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर को केतकी और चंपा के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। मान्यता के अनुसार, केतकी के फूलों को भोलेनाथ ने शापित किया था। केतकी के फूल चढ़ाए जाने से भगवान शिव के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है। केतकी के फूल सफेद होने के बाद भी इन्हें भगवान शिव को अर्पित नहीं करना चाहिए। 

इस दिन शिव भक्तों को शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को नहीं खाना चाहिए। कहा जाता है कि शिवलिंग पर चढ़ाए गए प्रसाद को खाने से दुर्भाग्य आता है। साथ ही धनहानि होने की भी संभावना होती है। साथ ही शिवलिंग का अभिषेक में स्टील और प्लास्टिक के बर्तन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अभिषेक के दौरान सोना, चांदी या फिर कांसे का पात्र का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। 

भगवान शंकर की पूजा के दौरान ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें भूलकर भी टूटे हुए चावल न चढ़ाएं। अक्षत का मतलब पूर्ण चावल से होता है। ऐसे में भगवान शिव को अक्षत चढ़ाते समय यह ध्यान जरूर दें कि चावल टूटे न हों। टूटे चावल चढ़ाने से भोलेनाथ नाराज हो सकते हैं। 

बता दें शिवलिंग पर कभी भी नारियल फल या नारियल का पानी नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा शिवलिंग पर तुलसी पत्ता, हल्की, कुमकुम और सिंदूर आदि भी नहीं चढ़ाना चाहिए। शिवलिंग पर इन चीजों को चढ़ाने से शिवजी रुष्ट हो जाते हैं। साथ ही तीन पत्रों वाले बेलपत्र को पूजा में इस्तेमाल करना चाहिए। ध्यान रखें कि बेलपत्र कहीं से कटे-फटे न हों।

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