तेलंगाना की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे केसीआर, ऐसा रहा है मुख्यमंत्री तक का सफर

By अनुराग गुप्ता | Feb 16, 2022

हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) लगातार केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने दिल्ली के किले में सेंधमारी की बात कही थी और फिर सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर सवाल खड़ा कर दिया। इसको लेकर केसीआर और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बीच जुबानी जंग भी चल रही है। केसीआर ने कहा था कि आज भी मैं सबूत मांग रहा हूं। केंद्र सरकार सबूत दिखाए। भाजपा झूठा प्रचार करती है इसलिए लोग इसके लिए पूछ रहे हैं। भाजपा राजनीतिक तौप पर सर्जिकल स्ट्राइक का इस्तेमाल कर रही है। 

तेलंगाना के पहले मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख केसीआर का पूरा नाम कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव है। केसीआर मेदक जिले के गजवेल से विधायक हैं। उन्होंने साल 2 जून, 2014 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और फिर साल 2018 में समय से पहले चुनाव में उतर गए थे। केसीआर का विवाह शोभा से हुआ था। दंपत्ति के दो बच्चे हैं और दोनों ही सक्रिय राजनीति में भूमिका निभा रहे हैं। 

केसीआर की बेटी कलककुंटला कविता ने हिजाब मामले को लेकर एक कविता लिखी थी। जिसके जरिए उन्होंने बताया था कि सिंदूर हो या फिर हिजाब महिलाएं फैसला करेंगी। जबकि बेटा केटी राम रवि विधायक हैं। 

मेदक जिले के चिंतामदका में 17 फरवरी, 1954 को जन्में केसीआर की शुरुआती शिक्षा दीक्षा आंध्र प्रदेश में हुई। उन्होंने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय से साहित्य में स्नात्कोत्तर की डिग्री ली। इसी बीच उन्होंने राजनीति में रुचि लेना शुरू कर दिया था और फिर 1985 में तेलुगू देशम पार्टी में शामिल हो गए थे और विधायक चुने गए थे।

केसीआर 1987 से 1988 तक आंध्र प्रदेश में राज्यमंत्री पद पर रहे। 1992-93 तक वे लोक उपक्रम समिति के अध्यक्ष रहे। 1997-99 तक केंद्रीय मंत्री रहे। 1999 से 2001 तक वे आंध्रप्रदेश विधानसभा में उपाध्यक्ष रहे। इसके बाद उन्होंने तेलुगू देशम पार्टी को अलविदा कहते हुए एकसूत्रीय एजेंडा के तहत तेलंगाना राष्ट्र समिति का गठन किया। 

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साल 2004 के लोकसभा चुनाव में केसीआर ने करीमनगर से अपनी किस्मत आजमाई थी और उन्हें सफलता भी मिली थी। यूपीए-1 सरकार में केसीआर को केंद्रीय श्रम और नियोजन मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि 2006 में उन्होंने संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वो फिर से सांसद बने लेकिन 2008 में अपनी पार्टी के 3 सांसदों और 16 विधायकों के साथ फिर से इस्तीफा दे दिया था।

दरअसल, तेलंगाना के मुद्दे को लेकर केसीआर लगातार इस्तीफा देते रहे। इसके बाद भी जनता ने उन पर विश्वास दिखाना कम नहीं किया। इतना ही नहीं उन्होंने तो तेलंगाना की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की थी जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। केसीआर की गिरफ्तारी के साथ ही उनके समर्थनों ने प्रदर्शन तेज कर दिया था और अंतत: उनकी मांग भी पूरी हुई और तेलंगाना नामक राज्य की स्थापना हुई।

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