By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 26, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के असैन्य परमाणु कार्यक्रम को मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए समझौते को समीक्षा के लिए कांग्रेस को भेज दिया है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन अब भी इस बात पर जोर दे रहा है कि यदि सऊदी अरब इजराइल के साथ संबंध सामान्य नहीं करता है तो यह समझौता आगे नहीं बढ़ेगा। ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उनकी इस घोषणा के बाद समझौते के लागू होने को लेकर संदेह पैदा हो गया था। प्रशासन के अधिकारी और मामले से परिचित अन्य लोगों ने इस बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि क्या सऊदी अरब के अब्राहम समझौते में शामिल होने की ट्रंप की मांग को कांग्रेस को भेजे गए गोपनीय दस्तावेज में भी शामिल किया गया है। कानून के तहत कांग्रेस को सत्र के दौरान 90 दिनों तक इस समझौते की समीक्षा करनी होगी।
यदि इस अवधि के दौरान कांग्रेस समझौते को खारिज करने वाला संयुक्त प्रस्ताव पारित नहीं करती है तो दोनों सदनों में मतदान के बिना ही समझौता प्रभावी हो सकता है। इस तरह के समझौतों की पूरी सामग्री का इतने उच्च स्तर पर गोपनीय रखा जाना असामान्य है। अन्य देशों के साथ किए गए पिछले असैन्य परमाणु समझौते, जिन्हें ‘123 समझौते’ के नाम से जाना जाता है, सार्वजनिक किए गए थे।
हालांकि, इनमें से कुछ में ऐसे गोपनीय परिशिष्ट शामिल थे जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया था। वाशिंगटन स्थित सऊदी दूतावास ने इस मामले पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि, सऊदी अरब के अब्राहम समझौते में शामिल होने पर ट्रंप के लगातार जोर देने से समझौते को अंतिम मंजूरी मिलने की प्रक्रिया जटिल हो सकती है।
2020 में हुए इन समझौतों के तहत इजराइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले अरब और मुस्लिम बहुल देशों की संख्या बढ़ी थी।