फर्जी टीकाकरण के मामलों में बड़ी मछली को न छोड़ें: बम्बई उच्च न्यायालय

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 29, 2021

मुंबई। बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि शहर में फर्जी कोविड-19 टीकाकरण शिविरों की जांच कर रही मुंबई पुलिस को ऐसे मामलों में शामिल ‘‘बड़ी मछली’’ की पहचान करनी चाहिए और उन्हें नहीं छोड़ना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी की पीठ ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका(बीएमसी) को भी निर्देश दिया कि वह अदालत को उन कदमों के बारे में सूचित करे, जो नगर निकाय ने एंटीबॉडी के लिये ऐसे शिविरों द्वारा ठगे गए लोगों और नकली टीके के कारण उनके स्वास्थ्य पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव की जांच करने के वास्ते प्रस्तावित किये हैं।

इसके बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि अधिवक्ता ठाकरे को मामले में जांच अधिकारियों से कहना चाहिए कि वे ‘‘घोटाले’’ में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शें। अदालत ने कहा, ‘‘हो सकता है कि बड़ी मछली की पहचान की जानी बाकी हो। उनकी पहचान की जानी चाहिए और उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए। पुलिस को कहा जाये कि जांच सही होनी चाहिए और किसी भी दोषी व्यक्ति को छूटने नहीं देना चाहिए।’’

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अदालत ने कहा कि बीएमसी को पीड़ितों की जांच करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में अदालत को सूचित करना चाहिए। अदालत ने पूछा कि बीएमसी और राज्य के अधिकारी अब तक यह निर्धारित करने में असमर्थ क्यों हैं कि पीड़ितों को कोविड-19 रोधी टीके के नाम पर क्या लगाया गया है। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘यह राज्य की विफलता प्रतीत होती है।

निगम जांच के बारे में क्यों नहीं सोचता? आप दुर्भाग्यपूर्ण लोगों के लिए क्या करने की सोच रहे हैं, आप हमें बृहस्पतिवार को बताएं।’’ राज्य और बीएमसी ने इससे पहले उच्च न्यायालय को बताया था कि शहर भर में कुल 2,053 लोग फर्जी टीकाकरण शिविरों के शिकार हुए हैं। उच्च न्यायालय एक जुलाई को इन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखेगा।

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