UAE का ऑफर देख मत करने लगना वल्ला हबीबी, भारतीयों के लिए गोल्डन ट्रैप साबित हो सकता है दुबई का सस्ता वाला वीजा

By अभिनय आकाश | Jul 09, 2025

क्या भारत की जनता अब दुबई शिफ्ट होने वाली है। एक ऐसी जगह न इनकम टैक्स देना होता है और न ही वीजा रिन्युल की झंझट है। जहां लग्जरी लाइफ स्टाइल और ग्लोबल एक्सपोजर भी मिलता है। अब तो उस देश ने एक ऐसी वीजा पॉलिसी की घोषणा कर दी है, जो दुनियाभर के टॉप माइंड, क्रिएटर्स और इंवेस्टर्स को अटैक करने वाली है। दुबई ने अब एक ऐसा मास्टर चेंज या प्लान तैयार किया है जिसमें लगभग 23 लाख रुपए की फीस देकर भारतीयों को यूएई गोल्डन वीजा दे रहा है। ये केवल एक आम वीजा पॉलिसी नहीं है। ये बड़े ग्लोबल टालेंट रेस का हिस्सा है, जिसमें दुबई ने एक बड़ी चाल चली है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि इसका सबसे ज्यादा असर कहां पड़ेगा। क्या भारत को इससे नुकसान होगा या फायदा? क्या और भी ज्यादा ब्रेन ड्रेन होगा? सारे मामलों का एमआरआई स्कैन करते हैं। शुरुआत सबसे बेसिक से करते हैं।

गोल्डन वीजा का कंसेप्ट 2010 में सबसे पहली बार यूरोप में आया। स्पेन, पुर्तगल, ग्रीस जैसे देशों ने अपने इकनॉमिक स्लो डाउन के वक्त इसे लॉन्च किया ताकी फॉरेन इंवेस्टर्स आए और रिएल एस्टेट में पैसा लगाएं। जिससे उनकी अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर आ जाए। इस पॉलिसी का सीधा सा मतलब था कि तुम पैसा लाओ, हम तुम्हें वीजा देंगे।  दरअसल, गोल्डन वीजा एक तरह रिजिडेंस वीजा होता है जो किसी देश में किसी भी विदेश नागरिक को लंबे समय तक काम और बिजनेस वो भी बिना किसी लोकल इंपासर के करने की इजाजत देता है। ये वीजा पांच-दस या कई केस में परमानेंट वैलिडिटी के साथ दिया जाता है। पहले ये सिर्फ अल्ट्रा रिच लोगों के लिए होता था। जैसे स्पेन, पुर्तगल, ग्रीस जैसे यूरोपियन देशों ने वैश्विक मंदी के बाद इसे लॉन्च किया था।

यूएई का कॉन्सेप्ट थोड़ा अलग 

यूएई ने इस कॉन्सेप्ट को नए अंदाज में 2019 में लॉन्च किया। जिसमें पैसा महत्वपूर्ण है, लेकिन टैलेंट और योगदान को और ज्यादा वैल्यू दी गई। 

तीन चीजों पर फोकस 

तेल पर निर्भरता को कम करना

टेक और नॉलेज इकोनॉमी बनाना

ग्लोबल टैलेंट को मिडिल ईस्ट में लाना

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कौन कर सकता है आवेदन ?

अब दुबई ने अब एक ऐसा मास्टर चेंज या प्लान तैयार किया है जिसमें लगभग 23 लाख रुपए की फीस देकर भारतीयों को यूएई गोल्डन वीजा दे रहा है।  योजना की खास बात यह है कि ये अब सिर्फ अमीर निवेशकों तक सीमित नहीं है। मिडिल क्लास प्रोफेशनल्स और क्रिएटिव इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी इसके योग्य है। इनमें शामिल हैं: टीचर, प्रिंसिपल, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, रिसर्चर, अनुभवी नर्स, कॉर्पोरेट एग्जिक्यूटिव्स, यूट्यूबर, पॉडकास्टर ई-स्पोट्र्स प्रोफेशनल (25 वर्ष से ऊपर), और मैरिटाइम सेक्टर के लोग जैसे पोर्ट अधिकारी, यॉट ओनर।

23 लाख देकर वीजा मिल जाएगा?

नहीं। एईडू 100,000 (लगभग 23.3 लाख रुपये) की एकमुश्त फीस केवल तभी ली जाती है जब आप स्क्रीनिंग पास कर चुके हों और आपको नॉमिनेशन मिल गया हो। UAB ने साफ किया है कि यह कोई "पे-टु-स्टे" योजना नहीं है, बल्कि योग्यता आधारित चयन है। इस वीजा के लिए कोई खुद सीधे अप्लाई नहीं कर सकता। आवेदन मान्यता प्राप्त कंसल्टेंसी के जरिए नामाकन के बाद शुरू होता है। पहले बैकग्राउड चेक होता है। इसके बाद कंसल्टेंसी UAE अधिकारियों को आवेदन भेजती है। आवेदक को यूएई जाने की जरूरत नहीं होती। भारत में ऑनलाइन पोर्टल व कॉल सेंटर के जरिए आवेदन किया जा सकता है।

पुराने वीजा से कैसे अलग है?

पहले वीजा के लिए कम से कम एई़डी 2 मिलियन (करीब 4.7 करोड़ रुपये) की प्रॉपर्टी खरीदना जरूरी था। लेकिन नए स्कीम में रियल एस्टेट या बिजनेस की कोई शर्त नहीं है। अब सिर्फ आपकी काबिलियत मायने रखती है। हां, अगर आप अभी भी निवेश करना चाहते हैं तो पुराने तरीके जैसे रियल एस्टेट बिजनेस, स्टार्टअप, या टॉप स्टूडेंट्स के लिए भी विकल्प खुले हैं। इस वीजा से लाइफटाइम रेजिडेंसी, फ्री काम करने, पढ़ने और आने-जाने की आजादी मिलेगी। आप अपने परिवार और स्टाफ को भी स्पॉन्सर कर सकते है। नौकरी बदलें या प्रॉपर्टी बिके वीजा बना रहेगा।

 बेस्ट ऑफ बेस्ट मीडिल क्लास प्रोफोशनल्स पर नजर

 इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया पर यूजर्स अपने रिएक्शन दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर आपको भारत के अंदर मर्सिडीज खरीदनी है तो आप 23 लाख देकर यूएई का वीजा ले सकते हैं। टैक्स के बावजूद भी आप वहां पर रह सकते हैं। आराम से मर्सिडीज ई क्लास यूएई में खरीद सकते हैं। हालांकि ये पहली बार नहीं है कि दुबई ने ऐशा कोई प्लान तैयार किया हो। इससे पहले भी साल 2019 में अपनी स्टैटर्जी के जरिए दुबई ने बिलिनियर्स को टारगेट किया। दुबई में इनवेस्ट करो तो गोल्ड वीजा मिलेगा। फिर साल 2022 में मल्टी मिलेनियर्स को टारगेट किया। 4.7 करोड़ का इनवेस्टमेंट करो तो गोल्डन वीजा मिल जाएगा। लेकिन इस बार मीडिल क्लास और प्रोफेशनल्स को टारगेट किया जा रहा है। सबसे हैरानी की बात ये है कि इस वीजा में केवल पांच हजार स्लॉट ही खोले गए हैं। इस पायलट प्रोजेक्ट को भारत और बांग्लादेश में ही खोला जा रहा है। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि यूएई बेस्ट ऑफ बेस्ट मीडिल क्लास प्रोफोशनल्स को टारगेट कर रहा है। इस तरह की स्टैटर्जी से केवल भारत ही नहीं जूझ रहा है। 

 

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