5 साल में 3 बार ड्रैगन की हुई हार, तवांग से पहले गलवान और डोकलाम में भी चीन ने टेक दिए थे घुटने

By अभिनय आकाश | Dec 13, 2022

चीन की तरफ से एलएसी पर एक बार फिर से हिमाकत की कोशिश की गई, जिसका उसे माकूल जवाब भी मिला। इस बार अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीनी सेना ने घुसपैठ की कोशिश की, जिसे भारतीय जवानों ने खदेड़ दिया। वैसे आपको बता दें कि अरुणाचल प्रदेश का विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। तवांग सीमा विवाद काफी पुराना है। 90 हजार वर्ग किलोमीटर पर चीन की तरफ से दावा किया जाता है। सीमा पर चीन की तरफ से इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत ही तेजी से डेवलप किया जा रहा है। चीन सीमा पर सड़क, रेल, एयर कनेक्टिविटी बढ़ाई है और एलएसी के पास अरुणाचल प्रदेश की तरफ चीन ने बुलेट ट्रेन तक पहुंचा दी है और गांव भी बसा दी है। चीन ने 5जी नेटवर्क भी चालू कर दिया गया है। भारत की तरफ से भी बहुत तेजी से  इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किए हैं। बीआरओ ने बहुत तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किए हैं, जो चीन को नहीं भा रहा है।  चीन भारत को प्रेशर में रखना चाहता है और उसे लगता है कि भारत का वर्चस्व इस इलाके में बढ़ता जा रहा है। पिछले पांच सालों यानी 2017 के डोकलाम विवाद से लेकर अभी के तवांग तक देखें तो तीन ऐसे मौके आएं जब चीन के नापाक इरादे में जिनपिंग की सेना को मुंह की खानी पड़ी है। 

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2017 का डोकलाम विवाद

भूटान के पठार में स्थित डोकलाम को लेकर भारत और चीन के बीच साल 2017 में विवाद देखने को मिला। दरअसल, भारत व भूटान के बीच सुरक्षा मामलों को लेकर संधि की गई थी, जिसके तहत विदेशी हमले की सूरत में दोनों एक दूसरे का सहयोग करने की बात कही गई है। डोकलाम विवाद की शुरुआत 16 जून, 2017 को उस वक्‍त हुई थी जब भारतीय सैनिकों ने चीन की पीएलए के सैनिकों को इस इलाके में सड़क निर्माण करने से रोका था। चीन जिस क्षेत्र में सड़क निर्माण कर रहा था, वह भूटान का इलाका है। इस दौरान दबाव बढ़ाने के लिए भारत ने ब्रिक्‍स सम्‍मेलन का बहिष्‍कार किया, जिससे अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर चीन की काफी किरकिरी भी हुई। लिहाजा चीन के लिए इस विवाद को सुलझाना बड़ी चुनौती बन गई थी। वहीं इसको लेकर जापान और अमेरिका ने भी भारत का साथ दिया था। कई दौर की वार्ता के बाद 28 अगस्‍त 2017 को चीन के साथ भारत ने भी अपनी-अपनी सेनाओं को पीछे हटाने का फैसला किया।

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गलवान की हिंसक झड़प

15-16 जून की रात को भारतीय सेना के जवानों पर चीन के जवानों ने लोहे की रॉड में लगे कटीले तारों से हमला कर दिया था।  इस हिंसक झड़प में भारतीय सेना के कर्नल समेत 20 जवान शहीद हो गए थे। तब से लेकर 7 जून तक सीमा पर काफी तनाव था। 10 महीने बाद दोनों देशों के बीच अपनी सेनाओं को पीछे हटाने को लेकर सहमति बनी।  

क्या है अरुणाचल विवाद

चीन के साथ भारत की 3488 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। ये सीमा ईस्टर्न, मिडिल, और वेस्टर्न तीन सेक्टर्स में बंटी हुई है। चीन अरुणाचल प्रदेश के 90 हजार वर्ग किमी के हिस्से पर अपना दावा करता है। जबकि, लद्दाख का करीब 38 हजार वर्ग किमी का हिस्सा चीन के कब्जे में है। इसके अलावा 2 मार्च 1963 को हुए एक समझौते में पाकिस्तान ने पीओके की 5,180 वर्ग किमी जमीन चीन को दे दी थी। 

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