By अनुराग गुप्ता | Aug 25, 2021
आपको बता दें कि लिथियम से रिचार्जेबल बैटरी बनाई जाती है। जिसका उपयोग मोबाइल फोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक वीकल्स में होता है। ऐसे में लिथियम को धरती से बाहर कौन निकालेगा। इसी का खेला चल रहा है।
चीन वित्तीय सहयोग करने के लिए तैयार
चीन ने संकेत दिया कि वह तालिबान के कब्जे वाले अफगानिस्तान को वित्तीय सहयोग प्रदान करेगा। तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के बाद काबुल को विभिन्न देशों द्वारा वित्तीय मदद रोके जाने के बीच चीन मदद करना चाहता है। हाल ही में चीन ने कहा था कि वह युद्धग्रस्त देश की मदद करने में ‘सकारात्मक भूमिका’ निभाएगा।चीन ने अमेरिका को निशाने पर लेते हुए कहा था कि वह अफगान संकट के लिए मुख्य गुनहगार है और अमेरिका, अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए कुछ किए बिना ऐसे हाल में छोड़कर नहीं जा सकता।वहीं, जी7 देशों की प्रस्तावित बैठक से पहले चीन ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अफगानिस्तान एक स्वतंत्र, संप्रभु राष्ट्र है। अमेरिका और उसके सहयोगियों को अतीत से सबक सीखना चाहिए और अफगानिस्तान से संबंधित मुद्दों पर समझदारी से काम लेना चाहिए।साल 2003 से 2020 तक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में वरिष्ठ कर्नल रहे झोउ बो ने न्यूयॉर्क टाइम्स में एक ऑप-एड में लिखा कि अमेरिका की वापसी के साथ बीजिंग, काबुल को राजनीतिक निष्पक्षता और आर्थिक निवेश की पेशकश कर सकता है जिसकी उसे सबसे ज्यादा जरूरत है।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में बदले हालात के बीच चीन के लिए आर्थिक विकास को खोजना एक पुरस्कार की तरह ही होगा। क्योंकि चीन काफी तेजी से अफगानिस्तान में इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास कर सकता है और अफगानिस्तान की जमीन के अंदर छिपे एक ट्रिलियन डॉलर के खनिज तक पहुंच सकता है।तालिबान को तबाह कर सकता है अमेरिकातालिबान भले ही अमेरिका को 31 अगस्त तक निकलने की चेतावनी दे रहा है कि लेकिन उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि अभी भी अमेरिका के पास उसे तबाह करने की हिम्मत और ताकत दोनों ही मौजूद है। चीन का मानना है कि अमेरिका कभी भी तालिबान को अफगानिस्तान से उखाड़ सकता है और तमाम विदेशी कंपनियों को भी अफगानिस्तान पर निवेश करने से रोक सकता है। ऐसे में अफगानिस्तान के हालात और भी ज्यादा बदतर हो सकते हैं।आर्थिक मोर्चे पर तालिबान को लगा झटका
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बाद अब वर्ल्ड बैंक ने अफगानिस्तान की तमाम परियोजनाओं के लिए दी जाने वाली फंडिंग को रोक दिया है। वहीं, अमेरिका ने पहले ही अफगानिस्तान की करीब 9.5 बिलियन डॉलर की संपत्ति को फ्रीज कर दिया था। इसके बाद आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक द्वारा फंडिंग रोके जाने से तालिबान को बड़ा झटका लगा है।
चीन का मानना है कि तालिबान के लिए अफगानिस्तान की सरकार को चला पाना काफी मुश्किल होगा। ऐसे में चीन अफगानिस्तान के हालातों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। माना जा रहा है कि चीन अफगानिस्तान पर अपना प्रभुत्व बढ़ाने के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ेगा। क्योंकि बात खनिज संप्रदा की है। जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिलेगी।राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान गहरे आर्थिक संकट की तरफ आगे बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले समय में आटा, दाल, चावल, तेल से लेकर दवाईयों तक की कीमत में भारी इजाफा हो सकता है। दूसरी तरफ जिस तरह से अमेरिका को तालिबान धमकी दे रहा है उसे नहीं भूलना चाहिए कि उसकी आर्थिक स्थिति को और भी कमजोर करने से अमेरिका चूकेगा भी नहीं। हालांकि तालिबान चाहता है कि उसके ऊपर से वैश्विक प्रतिबंधों को समाप्त किया जाए।हाल ही में तालिबान के प्रवक्ता ने कहा था कि अफगानिस्तान पर लगा आर्थिक प्रतिबंध पुननिर्माण की प्रक्रिया को कमजोर कर देगा। इसलिए प्रतिबंधों को समाप्त किया जाना चाहिए। इसका फैसला एकतरफा है और अफगानी लोगों के खिलाफ है।