By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 03, 2026
भारत ने कल के युद्धों के लिए अपनी सामरिक तैयारी को मजबूत करते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 350 किलोग्राम वजन का एक स्वदेशी टर्बोजेट इंजन विकसित किया है, जो अगली पीढ़ी की मिसाइलों और मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। यह तकनीक दुनिया के केवल कुछ चुनिंदा देशों के पास ही उपलब्ध है।
इस इंजन की क्षमताएं युद्ध के परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकती हैं। अगली पीढ़ी की क्रूज मिसाइलें अधिक गति, रेंज और सटीकता के साथ लक्ष्य भेदने में सक्षम होंगी। वहीं, जेट-संचालित कामीकेज़ ड्रोन, जो दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, अधिक प्रभावी साबित होंगे। यह भारत की रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं दोनों को मजबूत करेगा।
DRDO की यह उपलब्धि भारत की बढ़ती तकनीकी विशेषज्ञता को दर्शाती है। इस तरह के इंजन का विकास न केवल सैन्य अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भविष्य में अन्य एयरोस्पेस अनुप्रयोगों के लिए भी मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में भी सहायक होगा।
350 किग्रा टर्बोजेट इंजन का विकास भारत की आत्मनिर्भरता और रक्षा प्रौद्योगिकी में नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आने वाले कल के युद्धों के लिए देश की तैयारी को दर्शाता है और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत की स्थिति को और मजबूत करता है।