देश का नागरिक हर कसौटी पर खरा उतरा, संविधान पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने बताया क्यों कहते हैं भारत को मदर ऑफ डेमोक्रेसी

By अभिनय आकाश | Dec 14, 2024

संसद में संविधान पर बहस हुई। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत एनडीए के सहयोगियों ने अपनी बात रखी। जिसके बाद पीएम मोदी चर्चा में जवाब देते नजर आए। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे लिए ये बहुत ही गौरव का पल है। बड़ेगर्व के साथ लोकतंत्र के उत्सव को मनाने का अवसर है। संविधान के 75 वर्ष की यादगार यात्रा और विश्व के सबसे महान विशाल लोकंत्र की यात्रा इसके मूल में संविधान निर्माताओं की दूरदृष्टि और योगदान जिसको लेकर आज हम आगे बढ़ रहे हैं। 75साल पूरे होने पर उत्सव मनाने का पल है। मेरे लिए खुशी की बात है कि संसद भी इस खुशी में शामिल होकर अपनी भावनाओं को प्रकट कर रहे हैं। सभी सांसदों का उत्सव में हिस्सा लेने के लिए अभिनंदन। 75 वर्ष की उपलब्धि साधारण नहीं है। जब देश आजाद हुआ तब भारत के लिए जो जो संभावनाएं व्यक्त की गई थी। उन सभी संभावनाओं को परास्त करते हुए भारत का संविधान हमें यहां तक ले आया है। इस महान उपलब्धि के लिए देश के कोटि कोटि नागरिकों का आदर पूर्व नमन, जिन्होंने इस भावना और नई व्यवस्था को जीकर दिखाया है। संविधान निर्माताओं की भावना को जीने में पिछले 75 साल भारत का नागरिक हर कसौटी पर खरा उतरा है। इसलिए वो सर्वाधिक अभिनंदन का अधिकारी है।

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पीएम मोदी ने कहा कि संविधान निर्माता इस बात पर बहुत सजग थे। वो ये नहीं मानते थे कि भारत का जन्म 1947 में हुआ है और लोकतंत्र 1950 से आ रहा है। वो भारत की विरासत, महान संस्कृति और हजारों सालों की यात्रा को मानते थे। उन्हें इसका भान था। भारत का लोकतंत्र और लोकतांत्रिक प्रतिक विश्व के लिए प्रेरक रहा है। इसलिए आज भारत मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में जाना जाता है। हम लोकतंत्र की जननी है।

राजऋषि ने कहा था कि सदियों के बाद हमारे देश में एख बार फिर ऐसी बैठक बुलाई गई है। ये हमारे मन में गौरवशाली अतीत की याद दिलाती है। जब हम स्वतंत्र हुआ करते थे और बैठक बुलाते थे। 

राधा कृष्णनन जी ने कहा था कि इस महान राष्ट्र के लिए गणतांत्रिक व्यवस्था नई नहीं है। ये हमारे यहां इतिहास के शुरुआत से ही है। 

आंबेडकर ने कहा था कि ऐसा नहीं है कि भारत को पता नहीं था कि लोकतंत्र क्या होता है। एक समय भारत में कई गणतंत्र हुआ करते थे।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे संविधान के निर्माण की प्रक्रिया में नारी शक्ति ने बड़ी भूमिका निभाई थी। संविधान सभा में 15 महिला सदस्य थी।  सभी बहनें अलग अलग बैकग्राउंड की थी। उन्होंने जो सुझाव दिए उनका संविधान के निर्माण में बड़ा असर पड़ा था। इससे पहले पीएम मोदी के संबोधन चर्चा का विषय रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी बिना नाम लिए बखूबी विपक्ष के सवालों का जवाब देते रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने बिना नाम लिया तत्तकालीन सरकार को घेरा और अपातकाल की भी चर्चा की। 

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एक देश एक चुनाव पर आएगा विधेयक 

एक राष्ट्र, एक चुनाव से जुड़े दो विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश होने वाले हैं।  केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल निचले सदन में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पेश करेंगे। कांग्रेस के इमरान मसूद ने अपने संबोधन में उस समय का हवाला दिया जब संविधान सभा द्वारा संविधान तैयार किया जा रहा था। उन्होंने उस समय की बिगड़ती आर्थिक स्थिति की ओर ध्यान दिलाया। “उस समय भी जब व्यापक हिंसा हुई थी, संविधान शांति और समानता की बात कर रहा था।  

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