EAC PM ने Bank Consolidation की वकालत की, समान आकार के बड़े बैंक बनाने की दी सलाह

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 26, 2026

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने कहा है कि देश में बैंकों का इस तरह एकीकरण करने के प्रयास करने चाहिए कि समान आकार के कुछ बड़े बैंक बनाए जा सकें, लेकिन इससे बैंकिंग क्षेत्र में बाजार प्रतिस्पर्धा से कोई समझौता न हो। ईएसी-पीएम ने एक अध्ययन कार्यपत्र में कहा है कि बैंकों के एकीकरण से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में बढ़ रही अर्थव्यवस्था की बढ़ती ऋण जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों पर केंद्रित कार्यपत्र में कहा गया है कि भारतीय बैंकिंग उद्योग में संकेंद्रण कम होने के साथ बैंकों की बाजार हिस्सेदारी में काफी अंतर है।

वर्ष 2017 में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के सहयोगी बैंकों का विलय, 2019 में बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ विजया बैंक एवं देना बैंक का विलय और 2020 में 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का चार बैंकों में विलय होने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई है। ईएसी-पीएम ने कहा कि एकीकरण के इन प्रयासों से बैंकों को बड़े स्तर और परिचालन में तालमेल की संभावनाएं मिलीं, लेकिन इसका पूरा लाभ प्रौद्योगिकी के सफल एकीकरण, जोखिम संस्कृति में सामंजस्य और उत्पादकता में निरंतर सुधार पर निर्भर रहा। कार्यपत्र के मुताबिक, बैंकिंग क्षेत्र की दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रयास सफल रहे हैं।

हालांकि, कमजोर बैंकों के अधिग्रहण से उन्हें अपने में मिलाने वाले बैंकों की दक्षता और उत्पादकता पर असर पड़ा है। वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान 47 बैंकों के प्रदर्शन को इस अध्ययन में शामिल किया गया और उनकी दक्षता एवं उत्पादकता का आकलन करने के लिए डेटा एनवलपमेंट एनालिसिस (डीईए) पद्धति का इस्तेमाल किया गया। अध्ययन में शामिल बैंकों की औसत तकनीकी दक्षता वित्त वर्ष 2019-20 के 77.99 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 88.34 प्रतिशत हो गई।

वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की दक्षता 93.12 प्रतिशत रही, जबकि निजी बैंकों की दक्षता 86.02 प्रतिशत थी। वहीं, विदेशी बैंकों की दक्षता वित्त वर्ष 2019-20 से 2025-26 के दौरान 83-85 प्रतिशत के बीच रही। ईएसी-पीएम ने कहा कि भविष्य में बैंकिंग क्षेत्र में कृत्रिम मेधा (एआई) के साथ डिजिटलीकरण से दक्षता बढ़ेगी।

इससे युवा ग्राहकों की जरूरत के अनुरूप सेवाओं का अधिक निजीकरण होगा और बैंकिंग सेवाएं प्रतिक्रियात्मक से सक्रिय रुख की ओर बढ़ेंगी।

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