आर्थिक मामलों के सचिव ने कहा- राजकोषीय घाटे से भारत की रेटिंग पर दबाव नहीं पड़ना चाहिए

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 07, 2021

नयी दिल्ली। राजकोषीय घाटा बढ़ने से देश की सॉवरेन रेटिंग दबाव में नहीं आनी चाहिए। आर्थिक मामलों के सचिव (डीईए) तरुण बजाज ने यह बात कही है। बजाज ने कहा कि कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए ऊंचे खर्च की वजह से भारत का राजकोषीय घाटा बढ़ेगा, लेकिन इससे रेटिंग पर दबाव नहीं पड़ना चाहिए। बजाज ने उम्मीद जताई कि बजट के आंकड़ों की विश्वसनीयता की वजह से रेटिंग एजेंसियां भारत की सॉवरेन रेटिंग को मौजूदा स्तर पर ही कायम रखेंगी। बजट 2021-22 के अनुसार चालू वित्त वर्ष में देश का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 9.5 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है।

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सरकार उनके संपर्क में रहेगी और आंकड़ों के बारे में बताएगी। हमें उम्मीद है कि वे हमारी मौजूदा रेटिंग को कायम रखेंगे।’’ पिछले महीने पेश आर्थिक समीक्षा 2020-21 में कहा गया था कि भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद को नहीं दर्शाती है। समीक्षा में कहा गया था कि क्रेडिट रेटिंग का तरीका अधिक पारदर्शी होना चाहिए। समीक्षा में कहा गया था कि सॉवरेन रेटिंग के इतिहास में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को निवेश ग्रेड के निचले स्तर (बीबीबी-/बीएए3) पर रखा गया हो। जून में फिच रेटिंग्स ने भारत के लिए परिदृश्य को नकारात्मक से सकारात्मक करते हुए ‘बीबीबी-’ की रेटिंग थी। मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को बीएए2 से घटाकर बीएए3 किया था। पिछले साल जून में एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने लगातार 13वें साल भारत की रेटिंग को बीबीबी- पर कायम रखा था।

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