By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 07, 2026
लंदन उच्च न्यायालय ने बैंक ऑफ इंडिया के बकाया ऋण मामले में भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की उस याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया, जिसमें उसने दृष्टिहीनता, अवसाद और जेल की बाध्यताओं के कारण अपने मुकदमे को स्थगित करने का अनुरोध किया। नीरव (54) पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ लगभग दो अरब अमेरिकी डॉलर के धोखाधड़ी और धन शोधन मामले में भारत प्रत्यर्पित किए जाने का विरोध कर रहा है।
उन्होंने बताया कि नीरव मोदी अपनी दृष्टि का 60 प्रतिशत हिस्सा खो चुका है और गंभीर रूप से दृष्टिहीन हो चुका है, साथ ही वह नैदानिक अवसाद से ग्रसित है, जिसके कारण वह लंबे समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है और हाल तक उसे एक ऐसे कैदी के साथ जेल की कोठरी साझा करने के लिए मजबूर होना पड़ा जो दोपहर तक सोता रहता था। ऑनलाइन सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि नीरव मोदी को जेल के शिक्षा विभाग में रखा गया है, जहां वह अपनी नवीनतम प्रत्यर्पण अपील की तैयारी में व्यस्त है, जिसकी सुनवाई मार्च में होने की संभावना है। बैंक ऑफ इंडिया के बैरिस्टर टॉम बेस्ली ने शुक्रवार की सुनवाई से ठीक पहले अंतिम क्षण में दी गयी याचिका पर आपत्ति जताई। नीरव मार्च 2019 में जारी किए गए प्रत्यर्पण वारंट के तहत लंदन में जेल में बंद है और तब से उसकी कई अपील और जमानत के प्रयास विफल हो चुके हैं। भारत में उसके खिलाफ तीन प्रकार की आपराधिक कार्यवाही चल रही है।
इनमें पीएनबी धोखाधड़ी का केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का मामला, उस धोखाधड़ी से प्राप्त धन की कथित धन शोधन से संबंधित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का मामला और सीबीआई की कार्यवाही में साक्ष्य और गवाहों के साथ कथित हस्तक्षेप से संबंधित आपराधिक कार्यवाही का तीसरा मामला है। अप्रैल 2021 में, ब्रिटेन की तत्कालीन गृह मंत्री प्रीति पटेल ने नीरव मोदी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला साबित होने के बाद, इन आरोपों का सामना करने के लिए उसे भारतीय अदालतों में प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया था।