Economic Survey 2025: बजट से पहले पेश होता है आर्थिक सर्वेक्षण, जानें क्या है इसका महत्व

By अभिनय आकाश | Jan 31, 2025

आम बजट आने में अब एक ही दिन शेष रह गए हैं। वित्त मंत्री द्वारा फरवरी की पहली तारीख को संसद में बजट पेश किया जाएगा। वित्त मंत्रालय की ओर से इसको लेकर तैयारियां भी की जा रही हैं। लेकिन बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है, जिसे वित्त मंत्रालय का अहम दस्तावेज माना जाता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शुक्रवार को आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 जारी करने के लिए तैयार हैं, जो पिछले वित्तीय वर्ष में भारत के आर्थिक प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन पेश करेगा। आर्थिक सर्वेक्षण दोपहर 12 बजे लोकसभा में और दोपहर 2 बजे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। केंद्रीय बजट 2025 से एक दिन पहले प्रकाशित, रिपोर्ट आर्थिक चुनौतियों से निपटने और विकास में तेजी लाने के लिए नीतिगत सिफारिशों की रूपरेखा तैयार करते हुए कृषि, उद्योग और सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करेगी। गौरतलब है कि इस साल का आर्थिक सर्वेक्षण पिछले सर्वेक्षण के ठीक छह महीने बाद पेश किया जाएगा। 2024 भारत में एक चुनावी वर्ष था, जिसके कारण आखिरी सर्वेक्षण जुलाई 2024 में प्रस्तुत किया गया था। अब, आम चुनावों के बाद पूर्ण केंद्रीय बजट से पहले नए आर्थिक दृष्टिकोण के साथ, नवीनतम रिपोर्ट आगामी बजट में महत्वपूर्ण राजकोषीय नीतियों और सरकारी रणनीतियों के लिए मंच तैयार करेगी।

आम बजट से पहले वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किए जाने वाली समीक्षा को मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) की अनुपस्थिति में प्रधान आर्थिक सलाहकार और अन्य अधिकारी तैयार कर रहे हैं। परंपरागत रूप से इस दस्तावेज को सीईए की अगुवाई में तैयार किया जाता है। हालांकि, जुलाई 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार की पहली आर्थिक समीक्षा को वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार इला पटनायक ने तैयार किया था और इसे तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में पेश किया था। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में रघुराम राजन की नियुक्ति के बाद उस समय सीईए का पद खाली था। बाद में अरविंद सुब्रमण्यम अक्टूबर, 2014 में सीईए नियुक्त हुए।

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आर्थिक सर्वेक्षण को आमतौर पर दो भागों में विभाजित किया जाता है। 

पार्ट ए: यह देश के आर्थिक प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित रहता है। जिसमें चालू वित्तीय वर्ष के प्रमुख विकास, प्रमुख आर्थिक संकेतक और राजकोषीय रुझानों का विश्लेषण किया जाता है।

पार्ट बी: यह शिक्षा, गरीबी, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक सुरक्षा जैसे सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को रेखांकित करता है। यह जीडीपी वृद्धि, मुद्रास्फीति और व्यापार के लिए अनुमान भी प्रदान करता है।

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