By अनन्या मिश्रा | Jun 07, 2025
बकरीद 2025
इतिहास
बकरीद के मूल भाव को पैगंबर इब्राहिम की उस परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें अल्लाह के हुक्म पर पैगंबर ने अपने प्रिय पुत्र इस्माईल की कुर्बानी देने का फैसला किया था। पौराणिक मान्यता के मुताबिक एक रात पैगंबर इब्राहिम को सपना आया, जिसमें उनसे अपने सबसे प्यारे बेटे की कुर्बानी देने के लिए कहा गया।
पैगंबर ने इसको अल्लाह की आज्ञा मानकर इसका पालन किया और बेटे की कुर्बानी के लिए निकल पड़े। जब वह अपने बेटे की आंखों पर पट्टी बांधकर बलिदान देने लगे, तब अल्लाह ने उनकी इस परीक्षा को सफल माना और इस्माइल को बचा लिया। वहीं उसकी जगह एक मेंढ़ा यानी की भेड़ भेज दी। यह घटना इस बात की प्रतीक है कि सच्चे दिल से किया गया समर्पण और भक्ति अल्लाह जरूर स्वीकार करता है।
महत्व
बकरीद का पर्व सिर्फ एक धार्मिर परंपरा नहीं बल्कि सच्चे इरादे, आत्मत्याग और इंसानियत की शिक्षा देने वाला पर्व है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि अल्लाह पर अपना विश्वास बनाते हुए दूसरों की सहायता करना और अपने स्वार्थ को त्यागना ही असली धर्म है।