सूत्रों का दावा- शुक्रवार रात दिल्ली के रास्ते गुजरात पहुंचे थे एकनाथ शिंदे, फडणवीस से हुई थी मुलाकात

By अंकित सिंह | Jun 25, 2022

पिछले 5 दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में उठापटक का दौर जारी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर महाराष्ट्र की राजनीति में आगे क्या होने वाला है? दरअसल, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के 38 विधायक बागी हो चुके हैं। यही कारण है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी की सरकार अल्पमत में दिखाई दे रही है। हालांकि, शिवसेना की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि इसका फैसला तो विधानसभा में होगा। कुल मिलाकर देखें तो फिलहाल एकनाथ शिंदे आगे की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। एकनाथ शिंदे के गुट का दावा है कि सभी विधायकों ने उन्हें ही फैसला लेने के लिए अधिकृत किया है। ऐसे में एकनाथ शिंदे जो भी फैसला लेंगे सभी विधायक उसके उनका समर्थन करेंगे।

दावा किया जा रहा है कि शुक्रवार रात अचानक ही एकनाथ शिंदे गुजरात पहुंच गए थे। सूत्रों के मुताबिक गुजरात दौरे के दौरान एकनाथ शिंदे ने भाजपा के बड़े नेता से मुलाकात की थी। दावा किया जा रहा है कि एकनाथ शिंदे गुवाहाटी से कल दे देर रात 10:30 बजे रवाना हुए थे। वह प्राइवेट जेट से रवाना हुए थे। 12:45 बजे दिल्ली पहुंचे थे। दिल्ली से रात 1:00 बजे वडोदरा के लिए रवाना हुए थे। 2:30 बजे से वडोदरा पहुंचे थे। 3:00 बजे वह फिर दिल्ली वापस लौटते हैं। दिल्ली से 410 में गुवाहाटी के लिए एकनाथ शिंदे रवाना हुए और सुबह 6:45 पर पहुंचे हैं। खबर तो यह भी है कि इंदौर एयरपोर्ट को भी कल रात में खुला रखा गया था। सूत्रों ने तो यह भी दावा किया है कि वडोदरा में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की मुलाकात हुई थी।

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हमने शिवसेना नहीं छोड़ी है: बागी विधायक

शिवसेना के असंतुष्ट विधायक दीपक केसरकर ने कहा कि विधायक दल में बागी गुट के पास दो तिहाई बहुमत है और उन्होंने महाराष्ट्र के वरिष्ठ मंत्री एकनाथ शिंदे को अपना नेता नियुक्त किया है। केसरकर ने कहा कि उन्होंने शिवसेना नहीं छोड़ी है, लेकिन अपने समूह का नाम शिवसेना (बालासाहेब) रखा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ 16 या 17 लोग 55 विधायकों के समूह के नेता को नहीं बदल सकते हैं और शिवसेना का बागी गुट शिंदे को शिवसेना समूह के नेता के रूप में बदलने के महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरि जिरवाल के आदेश को अदालत में चुनौती देगा। केसरकर ने कहा, ‘‘विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से कहा था कि हमें उस पार्टी के साथ रहना चाहिए जिसके साथ हमने चुनाव लड़ा था.. जब इतने सारे लोग एक ही राय व्यक्त करते हैं, तो उसमें कुछ ठोस होना चाहिए।’’ 

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