Bombay High Court: महिला के Bedroom में बिना इजाजत घुसना Privacy का उल्लंघन, पुलिस पर 10,000 का जुर्माना

By अभिनय आकाश | Jul 13, 2026

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना पुलिस का किसी महिला के बेडरूम में जबरन घुसना और उसका मोबाइल फ़ोन ज़ब्त करना, उसकी प्राइवेसी और गरिमा का उल्लंघन है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को 26 साल की याचिकाकर्ता को मुआवज़े के तौर पर 10,000 रुपये देने का निर्देश दिया। नागपुर बेंच के जस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के और निवेदिता मेहता ने कहा कि प्राइवेसी का अधिकार, संविधान के आर्टिकल 21 के तहत गारंटीकृत जीवन और व्यक्तिगत आज़ादी के अधिकार का एक अहम और अटूट हिस्सा है, और इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता। पिछले हफ़्ते दिए गए आदेश की कॉपी सोमवार को उपलब्ध कराई गई। बेंच ने कहा कि कानूनी सुरक्षा उपायों का पालन किए बिना किसी नागरिक के घर में, खासकर किसी महिला के बेडरूम में घुसना और ज़बरदस्ती उसका मोबाइल फ़ोन ज़ब्त करना, निजता और सम्मान का गंभीर उल्लंघन है।

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नागपुर के सावनेर की रहने वाली याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने एक मामले की जांच के बहाने गैर-कानूनी तरीके से उनके घर और बेडरूम में घुसकर, बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए उनका मोबाइल फोन ज़ब्त कर लिया। पुलिस का कहना था कि वे कार दुर्घटना के सिलसिले में उनसे पूछताछ करने के लिए उनके घर गए थे। महिला ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना कोई नोटिस दिए बार-बार उनके घर आकर पूछताछ के नाम पर उन्हें और उनके पति को परेशान किया। उन्होंने यह भी कहा कि 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' के तहत तय प्रक्रिया का पालन किए बिना उनका मोबाइल फोन ज़ब्त करके दो दिन तक अपने पास रखा गया, जबकि इस मामले में न तो उन्हें और न ही उनके पति को आरोपी बनाया गया था।

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