Bengal से रोजाना 5 से 10 हजार घुसपैठिये वापस Bangladesh जा रहे, Holding Centers की संख्या भी तेजी से बढ़ी

By नीरज कुमार दुबे | May 30, 2026

पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ अब तक का सबसे व्यापक अभियान चल रहा है और इसके नतीजे जमीन पर साफ दिखाई देने लगे हैं। राज्यभर में संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान, सत्यापन और वापसी की प्रक्रिया को तेज करते हुए होल्डिंग सेंटरों की संख्या महज एक सप्ताह के भीतर बढ़कर 11 हो गई है। इन केंद्रों में फिलहाल साढ़े तीन सौ से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिक रखे गए हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या उत्तर 24 परगना के बसीरहाट क्षेत्र में है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठियों की ओर से बना लिये गये अवैध ढांचों पर बुलडोजर की कार्रवाई भी लगातार चल रही है।

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उधर, सीमा सुरक्षा बल और बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा एजेंसी के बीच सत्यापन और प्रत्यावर्तन को लेकर बातचीत जारी है। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकता की आधिकारिक पुष्टि के बाद घुसपैठियों को चरणबद्ध तरीके से बांग्लादेश भेजा जा रहा है। यह संदेश साफ है कि भारत की सीमा कोई खुला दरवाजा नहीं है और अवैध रूप से प्रवेश करने वालों को अब वापस जाना ही होगा।

पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पकड़े गए लोगों ने स्वीकार किया कि एजेंट सीमा पर गश्त के बीच के समय का फायदा उठाकर उन्हें भारत में प्रवेश कराते थे। प्रति व्यक्ति सात हजार से बीस हजार रुपये तक वसूले जाते थे। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कराए जाते और उन्हें राजमिस्त्री, दिहाड़ी मजदूर या घरेलू कामगार के रूप में विभिन्न इलाकों में बसाया जाता था। यह केवल घुसपैठ नहीं, बल्कि एक संगठित और सुनियोजित तंत्र का संकेत है, जिस पर अब करारा प्रहार हो रहा है।

इसी बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में कहा कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद स्थिति तेजी से बदली है। उन्होंने कहा कि जहां पहले प्रतिदिन हजारों घुसपैठिए राज्य में प्रवेश करते थे, वहीं अब 5 से 10 हजार लोग प्रतिदिन वापस लौट रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनसांख्यिक परिवर्तन आयोग जनसंख्या संरचना में बदलाव और उसके कारणों का अध्ययन करेगा तथा आवश्यक कानूनी उपायों पर विचार करेगा।

देखा जाये तो इस पूरे अभियान के बीच मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी की सरकार की नीतियों की व्यापक चर्चा हो रही है। सीमावर्ती जिलों में तेजी से हो रही कार्रवाई, नए होल्डिंग सेंटरों की स्थापना, पहचान सत्यापन अभियान और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय ने यह संकेत दिया है कि अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार किसी भी तरह की ढिलाई के पक्ष में नहीं है। वर्षों से लंबित इस समस्या पर निर्णायक कदम उठाने का प्रयास दिखाई दे रहा है।

देखा जाये तो अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए यह एक सख्त चेतावनी है। फर्जी दस्तावेज, एजेंटों के नेटवर्क और पहचान छिपाने की पुरानी तरकीबें अब काम नहीं आने वाली हैं। कानून का शिकंजा लगातार कस रहा है और हर स्तर पर सत्यापन अभियान चल रहा है। जो लोग अवैध तरीके से भारत में रह रहे हैं, उनके लिए सबसे उचित विकल्प यही है कि वे कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करें और स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएं।

बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि पश्चिम बंगाल में चल रहा यह अभियान राष्ट्रीय हित, कानून के शासन और जनसांख्यिक संतुलन की रक्षा का भी प्रश्न है। आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे साफ है कि अवैध घुसपैठ के खिलाफ अब निर्णायक दौर शुरू हो चुका है।

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