भीलवाड़ा मॉडल ने आखिर कैसे पछाड़ दिया कोरोना जैसी महामारी को ?

By डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा | Apr 08, 2020

कोरोना वायरस पर विजय पाने में जिस तरह से भीलवाड़ा ने प्रयास किए हैं आज सारी दुनिया के सामने यह प्रयास भीलवाड़ा मॉडल के रूप में उभर कर आया है। शुरुआत दौर में ही भीलवाड़ा के एक निजी अस्पताल के चिकित्सक की मामूली भूल बड़े संकट का कारण बन गई थी और जिस तरह से शुरुआती दौर में भीलवाड़ा इसका केंद्र बनकर उभरा और समूचे देश ने भीलवाड़ा की ओर कातर दृष्टि से देखना आरंभ किया ठीक उसी समय से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सघन निगरानी और समन्वय का परिणाम रहा कि स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयासों से भीलवाड़ा आज समूचे देश के सामने रॉल मॉडल के रूप में उभर कर आया है। दरअसल देखा जाए तो भीलवाड़ा ने सुरक्षा मापदण्डों को कड़ाई से लागू करने के साथ ही योजनाबद्ध तरीके से इस संकट से समूचे जिले और प्रदेश को संक्रमित होने से बचाने के कारगर प्रयास किए। जहां एक और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समूचे प्रदेश के साथ ही भीलवाड़ा की स्थिति की करीबी निगरानी में जुटे रहे वहीं राज्य के स्वास्थ्य विभाग, गृह विभाग व आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन में समन्वय का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। दरअसल कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए जिस तरह की रणनीति अपनाई गई वह अपने आप में कारगर सिद्ध हुई। यही कारण है कि केन्द्रीय कैबिनेट सचिव राजीव गौबा आज भीलवाड़ा को पूरे देश में रोल मॉडल के रूप में देख रहे हैं।

 

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कोरोना वायरस की भयावहता को नकारा नहीं जा सकता। देश के लगभग सभी प्रदेश लॉक डाउन के दौरान कोरोना के खिलाफ किलेबंदी में जुट गए हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने समय रहते कोरोना की भयावहता को समझा और उसी का परिणाम रहा कि भारत में सबसे पहले राजस्थान की सरकार ने 31 मार्च तक के लिए लॉकडाउन की घोषणा की और बाद में समूचे देश में इसे 14 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया। राजस्थान की पहल को देखते देखते देश के अन्य राज्य भी लॉकडाउन घोषित कर कोरोना को तीसरे स्टेज पर पहुंचने से रोकने के लिए एकजुट हो गए। दरअसल भीलवाड़ा के एक निजी हास्पिटल के चिकित्सक की गलती ने इसे कोरोना जोन बना दिया था पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में सरकार और मशीनरी जिस तेजी से जुटी उससे यहां भी कोरोना पर विजय पा ली गई और संतोष की बात यह है कि अब भीलवाड़ा में नया प्रकरण सामने नहीं आ रहा है।


दरअसल कोरोना से बचाव के लिए दूसरे के संपर्क में नहीं आना जरूरी है। प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर जिस तरह से 22 मार्च को समूचा देश तालियां, घंटे-घड़ियाल, थाली-लोटा बजाने लगा वह सामूहिक एकता और समर्पण का उदाहरण है पर कुछ उत्साही लोगों द्वारा 22 मार्च को पांच बजते ही एकत्रित होकर जश्न जैसा माहौल बना देना गंभीर हो जाता है। ठीक इसी तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक आवाज पर समूचे देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी 5 अप्रैल को रात 9 बजे 9 मिनट के लिए घरों की लाइट बंद कर मोमबत्ती, दीपक, मोबाइल की लाइट आदि जला कर एकजुटता और कोरोना संघर्ष में जुटे डॉक्टर्स, पैरामोडिकल स्टॉफ व वॉलंटियर्स के सम्मान में दीपावली जैसा माहौल बना दिया गया वह हमारी सामूहिक मानसिकता को दर्शाता है। हालांकि आलोचना प्रत्यालोचना और पटाखे छोड़ने को अतिउत्साहित कदम भी बताया जा रहा है पर खास बात यह है कि आज कोरोना के खिलाफ संघर्ष में सारी दुनिया एक हो चुकी है।


कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने का आइसोलेशन ही रोकथाम का एकमात्र विकल्प है। कमोबेश देश के सभी राज्यों में गंभीर कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि जहां वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों से फीडबैक लेने के साथ ही आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं वहीं स्वयं देर रात तक प्रतिदिन उच्चस्तरीय बैठकें कर प्रशासन को सक्रिय व व्यवस्थाओं को चाकचौबंद करने में जुटे हैं। सबसे अच्छी बात यह कि राजनीति से ऊपर उठकर केन्द्र व राज्यों में बेहतर समन्वय बनाया गया है।

  

इसमें कोई दो राय नहीं कि कोरोना महामारी ने सारी दुनिया को हिला कर रख दिया है। लगता है नया साल दुनिया के लिए महामारी का प्रकोप लेकर आया और मार्च आते-आते समूची दुनिया को कोरोना महामारी ने अपने गिरफ्त में ले लिया। चीन से आरंभ कोरोना महामारी ने सारी दुनिया को हिला कर रख दिया है। चीन के साथ ही इटली, स्पेन, फ्रांस, जर्मनी, ईरान, टर्की, इंग्लैण्ड आदि में जहां गंभीर स्थिति हो गई वहीं विश्व की महाशक्ति अमेरिका भी आज सबसे गंभीर संकट में आ गया है। अमेरिका में सबसे ज्यादा 3 लाख 11 हजार से अधिक लोग संक्रमित मिले हैं। दुनिया के 194 देश कोरोना की चपेट में आ गए हैं और एक मोटे अनुमान के अनुसार 12 लाख 18 हजार से अधिक संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं और कोरोना वायरस के कारण 65 हजार 841 लोग मौत के आगोश में आ गए हैं। दरअसल लॉकडाउन की सख्ती से पालना करने के लिए सरकार को नहीं आम आदमी को आगे आना होगा। जर्मनी में तो दो से अधिक लोगों के एकत्र होने पर ही रोक लगा दी गयी है। यह इसकी भयावहता को दर्शाता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचेत किया है कि लॉकडाउन को ही कर्फ्यू मानकर चलें नहीं तो सरकार को इससे भी कड़े कदम उठाने को बाध्य होना पड़ेगा।


दरअसल आज जिसे भीलवाड़ा मॉडल कह कर पुकारा जा रहा है वह स्थानीय प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों और आपसी तालमेल का अनूठा उदाहरण है। भीलवाड़ा कलेक्टर राजेन्द्र भट्ट ने स्थिति की भयावहता को समझा और भीलवाड़ा के निजी चिकित्सालय के प्रकरण के आते ही 20 मार्च को ही कर्फ्यू लगा दिया। जिले की सीमाओं को सील करना दूसरा बड़ा निर्णय रहा। इसके साथ ही स्थानीय निजी अस्पतालों और होटलों को अधिग्रहित करने में देरी नहीं की। एक तरह से पूरे जिले को ही कोरेंटाइन कर दिया। लॉक डाउन की सख्ती से पालना सुनिश्चित की। घर घर स्क्रीनिंग की गई और चिकित्सकों तथा पैरामेडिकल स्टॉफ सहित इस कार्य में लगे सभी वॉलंटियर्स की जिस तरह से हौसला अफजाई व मनोबल को बनाये रखा गया उससे स्थितियां बेहतर होती गईं। देखा जाए तो भीलवाड़ा मॉडल को इस रूप में देखा जाना चाहिए कि प्रशासन, पुलिस और चिकित्सा स्वास्थ्य के साथ जिस तरह का बेहतरीन तालमेल बनाया गया और उच्च स्तर पर स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा समूचे प्रदेश के साथ भीलवाड़ा की मॉनिटरिंग करते हुए स्थितियों पर नजर रखी गई, निर्देश दिए गए और फील्ड में उनकी पालना हुई उसी का परिणाम है कि भीलवाड़ा आज रोल मॉडल के रूप में सामने आया है। केन्द्र और राज्य सरकार की एडवाइजरी की सख्ती से पालना का ही परिणाम है कि देश का मैनचेस्टर कहलाने वाला भीलवाड़ा आज आधार केंद्र से निकल कर मॉडल के रूप में उभर कर आया है।

 

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जिस तरह से आज सारी दुनिया कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए एकजुट हो गई है और जिस तरह से कोरोना ने सारी दुनिया को बांध के रख दिया है वास्तव में यह सोचनीय इस मायने में हो जाता है कि सिवाय आइसोलेशन या यों कहे कि सोशल डिस्टेंस और सेनेटाइजिंग व संपर्क विहीनता की स्थिति का कोई विकल्प नहीं दिख रहा है। जल्दी ही इस महामारी से निपट लिया जाएगा पर अब वैज्ञानिकों के लिए भी नई चुनौती उभर कर आएगी कि इस तरह की महामारी से निपटने का कोई रोडमैप बन सके। खैर अभी तो देश के अन्य स्थानों पर भी राजस्थान के भीलवाड़ा जैसी दक्षता दिखानी होगी तभी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकेंगे। पूरा देश ही नहीं अपितु समूची दुनिया जिस रणनीति, संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ जुटी है और जिस तरह से धरती के भगवान अपनी पूरी टीम के साथ सेवा में जुटे हैं उसमें हमारी भागीदारी केवल और केवल निर्देशों की पालना करने और घर में ही अपने परिवार के साथ रहकर सजग नागरिक का दायित्व पूरा करना होगा। हमारी जरा-सी लापरवाही कितना विकराल रूप ले सकती है इसे हमें समझना होगा।


-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

 

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