By अभिनय आकाश | Jun 10, 2026
ईरान को पूरी तरह से कुचलने या फिर वहां सत्ता परिवर्तन करने की बेंजामिन नेतन्याहू की जो ज़िद है, वह अब खुद इजराइल की सुरक्षा और उसकी कूटनीतिक साख के लिए सबसे बड़ा जोखिम बन गई है। खाड़ी देशों से लेकर उसके सबसे बड़े मददगार अमेरिका तक हर कोई अब इजराइल के इस आक्रामक रवैया से तंग आकर दूरी बनाता दिख रहा है। हालिया घटनाक्रमों ने यह साफ कर दिया है कि मध्यपूर्व की राजनीति में इज़राइल इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। इस कूटनीतिक संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू से फोन पर तीखी बहस के दौरान कहा कि आप मेरी वजह से अब तक जेल में नहीं गए। आप मेरी शांति योजना में दखल देकर उसे बिगाड़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक ट्रंप ने फोन पर नेतन्या को साफ लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि संभल जाओ नहीं तो बहुत जल्दी तुम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिल्कुल अकेले पड़ जाओगे।
साल 2023 में गजा में सैनिक कार्रवाई शुरू करने के बाद से ही बहरीन ने अपने राजनिक को इजराइल से वापस बुला लिया था। क्यों उल्टा पड़ा नेतन्याहू का राजनीतिक दांव? बेंजामिन नेतन्याहू का पूरा राजनीतिक करियर और उनकी घरेलू साख इस बात पर टिकी थी कि वे इजराइल को अभैद्य सुरक्षा देंगे और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए नेस्तनाबूद कर देंगे। लेकिन उनकी ज़िद अब उन्हीं पर भारी पड़ रही है। ट्रंप जहां जल्द से जल्द इस युद्ध को खत्म कर वैश्विक तेल की कीमतों को स्थिर करना चाहते हैं, वहीं नेतनया अपने ऊपर चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों और घरेलू राजनीतिक दबाव के कारण युद्ध को खींचना चाहते हैं। गाजा, लेबनान और अब ईरान के साथ त्रिकोणीय मोर्चे पर लड़ते-लड़ते इजराइली सेना और वहां की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है। इजराइल के अपने रक्षा विशेषज्ञ मान रहे हैं कि नेतन्याहू की ज़िद ने देश को दुनिया की नजरों में एक परिया स्टेट यानी कि अलग-थलग देश बनाकर खड़ा कर दिया है। डॉनल्ड ट्रंप के बाहरी आर्थिक और कूटनीतिक दबाव के बाद फिलहाल इजराइल और ईरान दोनों ने ही अपने हमलों को रोकने के संकेत दिए हैं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक दौर में युद्ध केवल सैन्य ताकत से नहीं बल्कि कूटनीति से जीते जाते हैं। अमेरिका जैसी महाशक्ति के पीछे हटने और अरब देशों की बेरुखी के बाद इजराइल को अब यह समझ आ गया है कि ईरान को पूरी तरह से मिटाने की उसकी ज़िद खुद उसके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है।