भारत-चीन तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, भारत-पाक संबंधों को लेकर नये साल पर क्या बोले विदेश मंत्री जयशंकर

By गौतम मोरारका | Jan 02, 2023

पिछले साल दिसंबर में जिस तरह तवांग में हुई झड़प को लेकर भारत और चीन के रिश्ते तनावपूर्ण हो गये थे उसको देखते हुए यह सवाल उठता है कि नये साल में भारत और चीन के रिश्ते कैसे रहेंगे? इस बीच, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर एकतरफा बदलाव किए जाने की किसी भी कोशिश से भारत सहमत नहीं होगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नयी दिल्ली के बीजिंग के साथ संबंध ‘‘सामान्य नहीं’’ हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि चीन के साथ मुख्य मुद्दों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हम आपको बता दें जयशंकर ने भूमध्यसागरीय देश की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान साइप्रस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए यह बात कही।

चीन के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि भारत के सामने अपनी सीमाओं पर चुनौतियां हैं, जो कोविड काल के दौरान तीव्र हो गईं। उन्होंने कहा, "आज चीन के साथ हमारे संबंधों की स्थिति बहुत सामान्य नहीं है, क्योंकि हम वास्तविक नियंत्रण रेखा को एकतरफा बदलने के किसी भी प्रयास के लिए कभी सहमत नहीं होंगे।" 

पाकिस्तान पर वार

जयशंकर ने अपने भाषण के दौरान पाकिस्तान के मुद्दे पर कहा कि कोई भी देश आतंकवाद से भारत जितना पीड़ित नहीं है। उन्होंने किसी देश का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘हम सभी के साथ अच्छे पड़ोसी संबंध चाहते हैं। लेकिन अच्छे पड़ोसी संबंधों का मतलब यह नहीं है कि आतंकवाद के मुद्दे को दरकिनार कर दिया जाए।'' उन्होंने कहा, ''आतंकवाद के मुद्दे पर हम बहुत स्पष्ट हैं।’’ विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को बातचीत की मेज पर लाने के लिए आतंकवाद को औजार के रूप में इस्तेमाल नहीं करने दिया जा सकता।

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भारत के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख

तालियों की गड़गड़ाहट के बीच, जयशंकर ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में मोदी सरकार की नीतियों और प्रदर्शन से यह बहुत स्पष्ट है कि "मुख्य मुद्दों पर, कोई समझौता नहीं होगा।" उन्होंने कहा, "मैं कह सकता हूं कि इस समय दुनिया को भारत से बहुत उम्मीदें हैं। क्योंकि आज हमें एक मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जाता है, एक ऐसे देश के रूप में देखा जाता है जो दुनिया के सामने मौजूद समस्याओं को हल करने में योगदान देगा।"

रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख

विदेश मंत्री जयशंकर ने साथ ही संघर्ष को समाप्त करने के लिए रूस और यूक्रेन को साथ लाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा, "हमें एक ऐसे देश के रूप में भी देखा जाता है जो स्वतंत्र है, जिसके पास, जब खड़ा होना हो, खड़े होने का साहस है।'' उन्होंने कहा कि हमारे पास मेज के चारों ओर लोगों को लाने के लिए हर किसी से बात करने की क्षमता है। जयशंकर ने कहा, ''यूक्रेन संघर्ष वास्तव में बहुत गहरी चिंता का विषय है... प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर में घोषणा की कि हम वास्तव में मानते हैं कि यह अब युद्ध का युग नहीं है क्योंकि आप हिंसा के माध्यम से मतभेदों और मुद्दों को नहीं सुलझा सकते हैं।’’

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ‘‘शुरू से ही हमारा प्रयास रूस और यूक्रेन से संवाद और कूटनीति पर लौटने का आग्रह करना रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने खुद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के साथ कई मौकों पर बात की है।'' जयशंकर ने कहा कि मैंने खुद रूस और यूक्रेन में मेरे सहयोगियों से बात की। उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि यह आसानी से हल करने योग्य स्थिति नहीं है, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि जो देश वार्ता में विश्वास करते हैं, वे इस संबंध में स्पष्ट रूप से बात करें।'' उन्होंने कहा कि हम शांति के पक्ष में हैं और दुनिया का एक बड़ा हिस्सा हमारी तरह सोचता है।


मोदी सरकार की नीतियों की सराहना

जयशंकर ने कहा कि विदेशों में रहने वाले और तीन-चार साल के अंतराल के बाद देश की यात्रा करने वाले भारतीयों को एक ‘‘बदला हुआ’’ भारत देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘कोविड एक कठिन अनुभव रहा है। हम न केवल कोविड से निपटे हैं, बल्कि एक बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली, बेहतर वितरण प्रणाली, बेहतर सामाजिक-डिजिटल वितरण के साथ, वित्तीय या खाद्य सहायता मुहैया कराते हुए महामारी से बाहर आए हैं।’’ उन्होंने रेखांकित किया, ‘‘भारत में वह दौर बीत चुका है, जहां लोगों को अपनी देखभाल खुद करने के लिए छोड़ दिया जाता था, आज विदेशों में रहने वाले लोगों को उस बदलाव की सराहना करनी चाहिए और उसे समझना चाहिए।’’ जयशंकर ने साथ ही कहा कि भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक सुधार किए। बड़े सुधारों में बैंकिंग प्रणाली, क्रेडिट नीति में बदलाव, सेवा क्षेत्र को सहयोग, छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसाय, श्रम सुधार और शिक्षा सुधार शामिल हैं।

अनिवासी भारतीयों को सराहा

जयशंकर ने कहा कि जब से नरेंद्र मोदी सरकार सत्ता में आई है, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘‘विदेश में रहने वाले भारतीय मातृभूमि के लिए ताकत का एक बड़ा स्रोत रहे हैं।’’ विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले सात या आठ वर्षों में, दुनिया में जहां भी भारतीय मुश्किल में थे, भारत सरकार उनकी मदद के लिए पहुंच गई। साइप्रस की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के अंतिम चरण में जयशंकर ने कहा कि भारत जी-20 की अध्यक्षता इस तरह संभालेगा कि दुनिया देश की विविधता को समझेगी और उसकी सराहना करेगी। गौरतलब है कि भारत ने एक दिसंबर को औपचारिक रूप से जी-20 की अध्यक्षता ग्रहण की थी।

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