By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 22, 2022
जकार्ता| एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फेसबुक म्यामां के रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले नफरत भरे भाषणों पर लगाम लगाने में विफल रहा है और इस तरह के रवैये ने उनके खिलाफ ‘नरसंहार’ में एक निर्णायक भूमिका निभाई थी। ‘
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फेसबुक ने सभी आठ विज्ञापनों को प्रकाशित करने के लिए अनुमोदित कर दिया था।
हालांकि समूह ने विज्ञापनों को जारी किये जाने से पहले ही हटा लिया था। लेकिन इस इतना तो पक्का हो गया कि बेहतर करने के अपने वादों के बावजूद फेसबुक का मंच नफरत फैलाने वाले भाषणों को रोकने में विफल है।
रोहिंग्या विद्रोहियों के हमले के बाद म्यामां की सेना ने 2017 में पश्चिमी म्यामां के रखाइन राज्य में एक अभियान चलाया था। इस दौरान सात लाख से अधिक रोहिंग्या पड़ोसी बांग्लादेश में भाग गए थे।
विशेषज्ञों का दावा है कि फेसबुक के मंच पर इस तरह के विज्ञापनों का दिखना अब भी जारी है।