Fadnavis सरकार का 'मराठी' दांव, Maharashtra से Bihar-UP तक सियासी बवाल खड़ा हुआ

By अंकित सिंह | May 02, 2026

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि राज्य के निवासियों को मराठी सीखने का प्रयास करना चाहिए, साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाषा के नाम पर हिंसा अस्वीकार्य है। उनकी यह टिप्पणी राज्य सरकार के उस निर्देश के बीच आई है जिसमें ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी को अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने महाराष्ट्र को देश का प्रमुख विकास इंजन और आर्थिक शक्ति केंद्र भी बताया।

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हालांकि, भाजपा सरकार के इस फैसले ने बिहार और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं। भाजपा की सहयोगी पार्टी जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का यह निर्णय स्थानीय निवासियों के लिए मददगार हो सकता है, लेकिन टैक्सी चालकों सहित बड़ी संख्या में गैर-मराठी लोग वर्षों से वहां रह रहे हैं। इन टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। 

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और एनडीए की सहयोगी निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने कहा कि क्षेत्रीय भाषा जानना एक बात है और इसे अनिवार्य बनाना दूसरी बात। अगर सरकार ऐसे नियम लाना चाहती है, तो पहले उन्हें क्षेत्रीय भाषा में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जानी चाहिए। फिर भी, इस तरह के प्रतिबंध सही नहीं हैं। इनसे सद्भाव बिगड़ता है। बिहार और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों में विपक्षी दलों ने खुलकर आलोचना की। 

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राज्यसभा सांसद और आरजेडी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज कुमार झा ने कहा कि हमें इस तरह के तानाशाही आदेश बेहद अटपटे लगते हैं। भाषाएँ आपस में नहीं लड़तीं; बल्कि जो लोग भाषाओं का इस्तेमाल करके राजनीति करते हैं, वे लड़ते हैं। वास्तव में, भाषाएँ एक-दूसरे को समृद्ध करती हैं। दूसरे राज्यों के टैक्सी चालकों पर कोई विशेष भाषा थोपना उनके स्वाभाविक संचार को बाधित करता है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का आदेश हमारे संघीय ढांचे और संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के सिद्धांतों के विरुद्ध है। ऐसे आदेश केवल क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काते हैं। हालांकि, भाजपा लंबे समय से धर्म और क्षेत्र की राजनीति में लिप्त रही है। भारत के आर्थिक सर्वेक्षण (2016-17) और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के बाद के अद्यतनों के अनुसार, बिहार और उत्तर प्रदेश देश के 37 प्रतिशत कार्यबल का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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