बंगाल की प्रसिद्ध हस्तियां जिन्होंने पाया भारत रत्न पुरस्कार, जानें इनका संक्षिप्त इतिहास

By अभिनय आकाश | Jan 02, 2021

25 जनवरी 2019 को 10 राजाजी मार्ग स्थित प्रणब मुखर्जी के आवास की फोन की घंटी बजती है। दूसरी तरफ थे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। प्रधानमंत्री ने कहा कि  प्रणब दा. परंपरा तो ये है कि मैं भारत रत्न के लिए आपकी सहमति लेने स्वयं आपके आवास आऊं। लेकिन साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति आए हुए हैं। गणतंत्र दिवस पर हमारे मेहमान के रूप में। उनके साथ व्यस्तता है। इसलिए फोन पर आपकी अनुमति चाहता हूं। ताकि 26 जनवरी से पहले ऐलान किया जा सके। आप हां कह दें तो मैं राष्ट्रपति जी को फोन करूं। प्रणब मुखर्जी ने मुस्कुराते हुए हामी भर दी, मगर घर में किसी को नहीं बताया। साथ रहने वाली बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी को भी नहीं और उनको भी ये जानकारी टीवी पर न्यूज फ्लैश होने के बाद मिली। पूर्व राष्ट्रपति ने हंसते हुए बताया, ‘मेरी बेटी शर्मिष्ठा जो मेरे साथ रहती थी, मुझपर काफी गुस्सा हो गई। उसने कहा, ‘आपको भारत रत्न दिया जा रहा है और आप ऐसे रिएक्ट कर रहे हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। जिसके जवाब में प्रणब दा बोले कि इस पर मैंने कहा कि मैं औपचारिक अधिसूचना का इंतजार कर रहा था। बहरहाल, आज बात केवल प्रणब मुखर्जी की नहीं बल्कि भारत के उन सभी प्रसिद्ध बंगाली हस्तियों के बारे में  करेंगे जिन्हें भारत रत्न मिला।

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सत्यजीत रे: -

दुनिया के महानतम निर्देशकों में से एक, सत्यजीत रे का जन्म कलकत्ता (अब कोलकाता) में 2 मई, 1921 को एक बंगाली कायस्थ परिवार में हुआ था। वह कला और साहित्य की दुनिया में एक परिवार से थे। भारत के पहले और एकमात्र ऑस्कर विजेता निर्देशक रे ने फिल्म निर्माण के अपने जुनून को पूरा करने के लिए लंदन जाने से पहले एक ग्राफिक कलाकार के रूप में अपना करियर शुरू किया। उन्होंने 36 फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी पहली फिल्म पाथेर पांचाली (1955) ने कान फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ मानव वृत्तचित्र सहित 1992 में ग्यारह अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते, और 1992 में एक मानद अकादमी पुरस्कार दिया गया। रे को 1992 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

अरुणा आसफ अली: - अरुणा जी का जन्म बंगाली परिवार में 16 जुलाई सन 1909 ई. को हरियाणा, तत्कालीन पंजाब के 'कालका' नामक स्थान में हुआ था। इनका परिवार जाति से ब्राह्मण था। इनका नाम 'अरुणा गांगुली' था। अरुणा अली ने स्कूली शिक्षा नैनीताल में प्राप्त की थी। अरुणा आसफ अली ने 1930, 1932 और 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह के समय जेल भी गईं। 1958 ई. में 'दिल्ली नगर निगम' की प्रथम महापौर चुनी गईं। उन्हें 1992 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनकी मृत्यु 29 जुलाई 1996 को 87 वर्ष की आयु में नई दिल्ली में हुई। मृत्यु के एक वर्ष बाद, उन्हें वर्ष 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

अमर्त्य सेन: -

अमर्त्य सेन एक भारतीय अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता हैं। उन्होंने कल्याणकारी अर्थशास्त्र, सामाजिक पसंद सिद्धांत, आर्थिक और सामाजिक न्याय, अकालों के आर्थिक सिद्धांतों और विकासशील देशों के नागरिकों की भलाई के उपाय के सूचकांक में योगदान दिया है। बंगाली कायस्थ परिवार में 3 नवंबर 1933 को जन्म लेने वाले सेन को कल्याणकारी अर्थशास्त्र में उनके काम के लिए 1998 में आर्थिक विज्ञान में नोबेल मेमोरियल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। सेन को 1999 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

रवि शंकर: -

रवि शंकर चौधरी का जन्म 7 अप्रैल, 1920 को वाराणसी को बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ, जो सात भाइयों में सबसे छोटे भाई थे। जब रविशंकर बहुत छोटे थे, उनके पिता और भाई (उदय शंकर) भारत छोड़कर यूरोप रहने चले गए। इसने रविशंकर के यूरोपीय समाज में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त किया। 1930 में वह अपने भाई के पास पेरिस चले गए। 1938 में वह भारत वापस आ गए। रविशंकर ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की शिक्षा उस्ताद अल्लाऊद्दीन खाँ से प्राप्त की। रविशंकर ने 1938 से 1944 तक सितार का अध्ययन किया और फिर स्वतंत्र तौर से काम करने लगे। बाद में उनका विवाह भी उस्ताद अल्लाऊद्दीन खाँ की बेटी अन्नपूर्णा से हुआ। 1966 उनके लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष था। यह इस दौरान था कि बीटल्स के जॉर्ज हैरिसन उनके छात्र बन गए। उन्होंने कई ग्रैमी पुरस्कार, कई मानद डॉक्टरेट सहित कई पुरस्कार जीते हैं। भारतीय संगीत को दुनिया भर में सम्मान दिलाने वाले पंडित रविशंकर भारत रत्न और पद्मविभूषण से नवाजे गये। 

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प्रणब मुखर्जी: -

 प्रणब कुमार मुखर्जी का जन्म 11 दिसम्बर 1935, पश्चिम बंगाल में हुआ। प्रणब मुखर्जी भारत के तेरहवें राष्ट्रपति रह चुके हैं। प्रणब मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में किरनाहर शहर के निकट स्थित मिराती गाँव में एक ब्राह्मण परिवार में कामदा किंकर मुखर्जी और राजलक्ष्मी मुखर्जी के यहाँ हुआ था। नका संसदीय कैरियर करीब पाँच दशक पुराना है, जो 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में (उच्च सदन) से शुरू हुआ था। वे 1975, 1981, 1993 और 1999 में फिर से चुने गये। 1973 में वे औद्योगिक विकास विभाग के केंद्रीय उप मन्त्री के रूप में मन्त्रिमण्डल में शामिल हुए। वे सन 1982 से 1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे और और सन् 1982 में भारत के वित्त मंत्री बने। 1995 से 1996 तक पहली बार विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्हें रक्षा, वित्त, विदेश विषयक मन्त्रालय, राजस्व, नौवहन, परिवहन, संचार, आर्थिक मामले, वाणिज्य और उद्योग, समेत विभिन्न महत्वपूर्ण मन्त्रालयों के मन्त्री होने का गौरव भी हासिल है। न्यूयॉर्क से प्रकाशित पत्रिका, यूरोमनी के एक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 1984 में दुनिया के पाँच सर्वोत्तम वित्त मन्त्रियों में से एक प्रणब मुखर्जी भी थे। उन्हें सन् 1997 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का अवार्ड मिला। प्रणब मुखर्जी को 26 जनवरी 2019 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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