By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 26, 2026
अमेरिका स्थित भारतीय अमेरिकी पैरोकार समूह ने एच-1बी कार्य वीजा पर प्रस्तावित 1,03,265 अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त शुल्क को लेकर चिंता जताई और कहा कि इस कदम से अमेरिका से नौकरियां अन्य देशों में जा सकती हैं। ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ (एफआईआईडीएस) ने कहा कि इतने अधिक शुल्क से वैध नियुक्तियां आर्थिक रूप से अव्यावहारिक हो सकती हैं और न चाहते हुए भी कंपनियां उच्च मूल्य वाली नौकरियों को विदेशों में स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित हो सकती हैं। एफआईआईडीएस का यह बयान अमेरिकी गृह मंत्रालय द्वारा सभी एच-1बी वीजा की सीमा के दायरे में आने वाले सभी आवेदनों (जिनमें एडवांस्ड डिग्री छूट के लिए योग्य आवेदन भी शामिल हैं) के लिए 1,03,265 अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव दिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘हम डीएचएस और यूएससीआईएस से धन जुटाने के लिए अधिक उचित तरीका तलाशने, कांग्रेस (अमेरिकी सरकार) से एजेंसी के लिए पर्याप्त धन सुनिश्चित करने और उद्योग जगत से अमेरिका की प्रतिभा संबंधी जरूरतों को स्पष्ट करने का आग्रह करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिकी कामगारों की सुरक्षा और अमेरिका के तकनीकी नेतृत्व को बनाए रखना, ये दोनों कार्य साथ-साथ होना चाहिए।’’ एफआईआईडीएस ने कहा कि अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) को पहले से ही करीब 96 प्रतिशत धनराशि आवेदकों और याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए जाने वाले शुल्क से मिलती है।