Yes Milord | वोटर लिस्ट पर अंतिम मुहर सरकार नहीं, न्यायपालिका की निगरानी में लगेगी, SIR पर SC ने बंगाल का चुनाव पलट दिया!

By अभिनय आकाश | Feb 21, 2026

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से आज ऐसा झटका लगा जिसने चुनाव से पहले पूरी सियासत को हिला दी है। आज सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि एसआईआर पर राज्य सरकार और इलेक्शन कमीशन के बीच चल रहा टकराव बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और अब इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी न्यायिक अधिकारियों की देखरेख में होगी। अदालत नेक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को आदेश दिया कि जिला जज और एडीजे स्तर के बेदाग रिकॉर्ड वालेअधिकारियों को इस काम में लगाया जाए जो लोगों के दावे और आपत्तियों पर फैसला करेंगे। यानी अब वोटर लिस्ट पर अंतिम मोहर सरकार नहीं न्यायपालिका की निगरानी में लगेगी। तो ये फैसला ममता सरकार के लिए बड़ा चुनावी झटका माना जा रहा है क्योंकि जिस प्रक्रिया पर सत्ता का नियंत्रण माना जा रहा था वही अब कोर्ट की निगरानी में चली गई है। अब साफ संदेश यह है कि बंगाल में अब चुनावी खेल नियमों से होगा ना कि सत्ता की शर्तों पर और यही वजह है कि इस फैसले को दीदी की राजनीति के लिए बड़ा झटका और आने वाले चुनाव का टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। तो आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समझेंगे। बताएंगे कि कैसे ममता बनर्जी के लिए बैटल ऑफ बंगाल बड़ा मुसीबत बनता जा रहा है। 

इसे भी पढ़ें: Bengal Voter List विवाद में Supreme Court का बड़ा दखल, अब Judicial अधिकारी करेंगे जांच

राज्य के रुख पर एससी ने जताई निराशा

राज्य की ओर से कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि ग्रुप बी अधिकारी उपलब्ध कराए गए है। वहीं, ईसीआई की ओर से दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि ऐसे एसडीएम रैंक अधिकारी, जो अर्द्ध-न्यायिक आदेश पारित कर सके, उपलब्ध नहीं कराए गए। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के रुख पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि ईआरओ के रूप में कार्य करने के लिए अधिकारियों की आवश्यकता है। चीफ जस्टिस ने कहा कि वे ईआऱओ के रूप में अधिकारी मांग रहे है। हमे राज्य से सहयोग की अपेक्षा थी। सीनियर वकील श्याम दीवान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए और कहा कि माइक्रो-ऑब्जर्वर को आदेश पारित करने से रोके जाने के बाद, ईसीआई ने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर नामक एक नई श्रेणी के अधिकारी नियुक्त कर दिए है, जो ईआरओ द्वारा पारित आदेशों की व्यापक समीक्षा कर रहे है। उन्होंने कहा कि स्पेशल रोल ऑब्जर्वर ईआरओ पर हावी नहीं हो सकते। वे किस आधार पर सामूहिक रूप से ईआरओ के निर्णयों को अस्वीकार कर सकते है? चुनाव आयोग की ओर से नायडू ने इस दावे का खंडन किया और कहा कि स्पेशल रोल ऑब्जर्वर शुरुआत से ही नियुक्त थे।

कलकत्ता हाई कोर्ट को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि जिला जज या अतिरिक्त जिला जल स्तर के वर्तमान और पूर्व न्यायिक अधिकारियों को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाए। इस कदम का उद्देश्य है कि लंबित दावों और आपत्तियों का निष्पक्ष व पारदर्शी निपटारा हो सके। इसी वजह से शीर्ष अदालत को नई व्यवस्था अपनानी पड़ी। आंकड़े बताते हैं कि करीब 5 लाख नाम अब तक खारिज किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 5 लाख लोग सुनवाई में शामिल नहीं हुए। करीब 55 लाख नाम अब भी विभिन्न स्तरों पर सत्यापन के लिए लंबित हैं। कुल मिलाकर करीब 70 लाख लोग वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। 28 फरवरी को फाइनल लिस्ट जारी की जानी है।

प्रमुख खबरें

Gulf of Oman में गरमाई Geopolitics, अमेरिकी नौसेना को देखते ही प्रतिबंधित टैंकर ने बदला रूट

Champions League: Barcelona के सामने Comeback की बड़ी चुनौती, Atletico से Quarter-final में करो या मरो की जंग।

Grandmaster Harika Dronavalli ने तोड़ी चुप्पी, नमस्ते विवाद पर बोलीं- Social Media पर गलत समझा गया

Asian Wrestling में भारत का गोल्डन डे, Sujit और Abhimanyu ने Gold Medal जीतकर रचा इतिहास