By कमलेश पांडे | Jul 31, 2026
भारत में मध्यमवर्गीय परिवार के लोगों की नजर किसी भी माह की पहली तारीख पर टिकी रहती है, क्योंकि उस दिन सैलरी तो आती ही है, साथ ही किस मासिक नियम से उनके ऊपर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और किससे नहीं, यह भी पता चल जाता है। साथ ही तरह तरह की कागजी औपचारिकता के प्लस-माइनस का भी पता चल जाता है। इस बार भी 1 अगस्त 2026 से आम लोगों पर असर डालने वाले कई नियम और कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि इनमें कुछ बदलाव हर महीने होने वाली नियमित समीक्षा हैं, जबकि कुछ नए नियामकीय परिवर्तन हैं, जिन्हें जानना-समझना और उसी के अनुरूप खुद को ढालना जरूरी है ताकि बच्चों का जीवन प्रभावित नहीं हो।
दूसरा, बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड: कुछ बैंक क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट, सर्विस चार्ज, एसएमएस शुल्क और अन्य बैंकिंग शुल्क में बदलाव लागू कर सकते हैं। इसलिए अपने बैंक की सूचना गौरपूर्वक अवश्य देखें।
तीसरा, सीकेवाईसी (CKYC) 2.0: नई केंद्रीय केवाईसी प्रणाली का चरणबद्ध लागू होना शुरू होगा, जिससे भविष्य में बार-बार केवाईसी दस्तावेज़ जमा करने की जरूरत कम होगी और पहचान सत्यापन अधिक सुरक्षित होगा।
चौथा, जीएसटी (GST) नियम: ई-इनवॉइस और ई-वे बिल से जुड़े नियमों में बदलाव होंगे। इसका सीधा प्रभाव व्यापारियों और कंपनियों पर पड़ेगा, आम उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष असर हो सकता है।
पांचवां, रेलवे तत्कल टिकट: रेलवे आरक्षण काउंटर पर तत्कल टिकट के लिए टोकन व्यवस्था में बदलाव किया गया है, जिससे भीड़ कम करने और प्रक्रिया आसान बनाने का प्रयास है।
छठा, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR): जिन करदाताओं ने समय सीमा तक ITR दाखिल नहीं किया है, उन्हें अब विलंब शुल्क (लेट फीस) देना पड़ सकता है।
सातवां, होम लोन और ईएमआई (EMI): 3 अगस्त से शुरू होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद यदि रेपो रेट में बदलाव होता है, तो आने वाले दिनों में होम लोन, वाहन ऋण, एफडी और EMI पर असर पड़ सकता है। यह बदलाव 1 अगस्त से तुरंत लागू नहीं होगा, बल्कि MPC के निर्णय पर निर्भर करेगा।
एक, एलपीजी सिलेंडर: कीमतें बदलकर ऊपर जा सकती हैं।
दो, बैंकिंग सेवाएं: बैंक के अनुसार शुल्क बढ़ या घट सकते हैं।
तीन, रेस्टोरेंट/होटल: यदि व्यावसायिक एलपीजी महंगी होती है तो लागत बढ़ सकती है।
चार, पेट्रोल-डीजल पर 1 अगस्त से कोई सार्वदेशिक नया नियम घोषित नहीं है; इनके दाम सामान्य मूल्य निर्धारण व्यवस्था के अनुसार बदलते रहते हैं।
- कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार