By अभिनय आकाश | Aug 12, 2026
उत्तर अफ्रीकी देश लीबिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकाने पर मंडराता सुरक्षा संकट अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सैन्य बहस का रूप ले चुका है। पश्चिमी लीबिया स्थित जाविया ऑयल रिफाइनिंग कंपनी पर दो दिनों के भीतर लगातार तीन संदिग्ध ड्रोन अटैक हुए। गैसलीन और नेफ्था टैंकों को निशाना बनाने के बाद अब ड्रोन मुख्य पाइपलाइन नेटवर्क के पास क्रैश हो गया। जिसके बाद लीबिया के नेशनल ऑयल कॉरपोरेशन को मैक्सिमम इमरजेंसी का ऐलान करना पड़ा है। इस हमले ने सबसे ज्यादा ध्यान तब खींचा जब रक्षा विशेषों और वैश्विक मीडिया ने इन हमलों के पैटर्न और इस्तेमाल हुई ड्रोन तकनीक के तार ईरान से जोड़ने शुरू कर दिए। पश्चिमी लीबिया की आर्थिक रीड मानी जाने वाली जाविया रिफाइनरी इस वक्त बारूद के ढेर पर खड़ी है। 1,20,000 बैरल क्रूड ऑयल पर डे प्रोसेस करने वाली इस रिफाइनरी के गैसोलिन और नेफ्था स्टोरेज टैंकों पर ड्रोन अटैक ने भीषण आग भड़का दी।
सुरक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही इस हमले का सीधा आदेश तेहरान से ना आया हो लेकिन ईरान द्वारा विकसित सस्ते और घातक ड्रोन तकनीक का प्रसार अब उत्तर अफ्रीका के स्थानीय गुटों और उग्रवादी लड़ाकों तक पहुंच चुका है। लेबिया के सालों पुराने गृह युद्ध में विभिन्न गुटों के पास अब ऐसे अत्याधुनिक ड्रोन पहुंच चुके हैं जिनका इस्तेमाल वे तेल संसाधनों पर वर्चस्व जमाने या प्रतिद्वंदी सरकारों को ब्लैकमेल करने के लिए कर सकते हैं। यानी तकनीकी भले ईरानी पैटर्न की हो लेकिन निशाना लीबिया की अपनी अर्थव्यवस्था है। यदि जाविया रिफाइनरी में लंबे वक्त के लिए काम ठप होता है तो इसका असर केवल लीबिया तक सीमित नहीं रहेगा।
भूमध्य सागर से सटे इस इलाके में तेल आपूर्ति बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि पश्चिमी देश और संयुक्त राष्ट्र लीबिया के तेल बुनियादी ढांचे पर ड्रोन तकनीक के इस बढ़ते इस्तेमाल को पूरे क्षेत्र के लिए एक नया और खतरनाक मोड़ मान रहे हैं। जाविया रिफाइनरी पर हुए ड्रोन हमलों ने साफ किया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोनों का बढ़ता इस्तेमाल अब उत्तर अफ्रीका की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। ईरान शैली के ड्रोन तकनीक का स्थानीय गुटों के हाथों में पहुंचना एक ऐसा खतरा बन चुका है जिससे निपटने के लिए वैश्विक ताकतों को नए सुरक्षा समीकरण बनाने पड़ सकते हैं। सऊदी अरब की सबसे महत्वपूर्ण जिजान अरामको रिफाइनरी पर 5 अगस्त को हुए होती हमले को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा हुआ है।