By Ankit Jaiswal | Jul 09, 2026
अर्जेंटीना और मिस्र के बीच खेले गए विश्व कप के प्री-क्वार्टर मुकाबले को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मैच खत्म होने के बाद अब यह बहस केवल खिलाड़ियों और फुटबॉल विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई सार्वजनिक हस्तियां भी इस मुद्दे पर अपनी राय रख रही हैं। इसी क्रम में न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने भी मिस्र के समर्थन में बयान देकर इस विवाद को नई चर्चा दे दी है।
गौरतलब है कि मैच के दौरान वीडियो सहायक रेफरी के कुछ फैसलों को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी विवाद के बीच न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि उनके अनुसार मिस्र के साथ नाइंसाफी हुई। उन्होंने यह टिप्पणी शहर में बेहतर बस सेवा से जुड़ी नई पहल के शुभारंभ के दौरान की। अपने संबोधन में उन्होंने लोगों के समय की बचत का जिक्र करते हुए कहा कि अतिरिक्त समय मिलने पर लोग अपने दोस्तों के साथ इस बात पर भी सहमत हो सकेंगे कि पिछले दिन मिस्र के साथ गलत हुआ।
उनका यह बयान सामने आते ही सामाजिक माध्यमों पर तेजी से वायरल हो गया। बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी टिप्पणी का समर्थन किया, जबकि कई लोगों ने इसे केवल व्यक्तिगत राय बताया। हालांकि उनके बयान का मैच के आधिकारिक परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
बता दें कि विवाद की सबसे बड़ी वजह दूसरे हाफ का वह घटनाक्रम रहा, जब मिस्र के खिलाड़ी मुस्तफा जीको ने शानदार गोल किया था। लेकिन वीडियो सहायक रेफरी की लंबी समीक्षा के बाद रेफरी ने गोल को रद्द कर दिया। अधिकारियों का मानना था कि गोल बनने से पहले मिस्र के खिलाड़ी मरवान अटिया ने अर्जेंटीना के खिलाड़ी लिसांद्रो मार्टिनेज के खिलाफ फाउल किया था।
इस फैसले के बाद कई फुटबॉल विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने सवाल उठाए कि यदि कथित फाउल गोल बनने से काफी पहले हुआ था, तो वीडियो सहायक रेफरी को उस स्थिति में हस्तक्षेप करना चाहिए था या नहीं। यही फैसला पूरे मुकाबले का सबसे बड़ा विवाद बन गया।
इसके बावजूद मिस्र ने बाद में 2-0 की बढ़त बना ली थी, लेकिन अंतिम चरण में अर्जेंटीना ने जबरदस्त वापसी की। लियोनेल मेसी ने पहले क्रिस्टियन रोमेरो के गोल में अहम भूमिका निभाई और फिर अर्जेंटीना ने अतिरिक्त समय में दो और गोल दागकर मुकाबला 3-2 से जीत लिया।
मैच के दौरान एक अन्य विवाद उस समय भी सामने आया जब अर्जेंटीना के जूलियन अल्वारेज और मोहम्मद सलाह के बीच हुई चुनौती पर मिस्र ने पेनाल्टी की मांग की। हालांकि रेफरी ने पेनाल्टी नहीं दी। इसके बाद मिस्र के खिलाड़ियों, टीम प्रबंधन और प्रशंसकों ने रेफरी के कई फैसलों पर सवाल उठाए।
मिस्र के मुख्य कोच हुसाम हसन और मिस्र फुटबॉल संघ ने भी रेफरी के फैसलों पर आपत्ति जताई। संघ ने कहा कि वह उन निर्णयों पर चुप नहीं रह सकता, जिन्हें वह असंगत और अनुचित मानता है। उनका कहना है कि कई महत्वपूर्ण फैसलों का सीधा असर मैच के नतीजे पर पड़ा।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ के रेफरी प्रमुख पियरलुइजी कोलिना ने किसी भी तरह के पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी आक्रमण की शुरुआत में फाउल हुआ है, तो नियमों के अनुसार उसकी समीक्षा की जा सकती है। उनका कहना था कि फाउल, फाउल ही होता है, चाहे वह गोल बनने से कुछ क्षण पहले हुआ हो या उससे पहले। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बिना ठोस आधार के रेफरी पर लगाए जाने वाले आरोप मैच अधिकारियों के खिलाफ अनावश्यक दबाव और दुर्व्यवहार की स्थिति पैदा कर सकते हैं।