Argentina की जीत पर Egypt का हंगामा, रेफरी विवाद पर FIFA का कड़ा जवाब- हमारे फैसलों पर सवाल न उठाएं।

By Ankit Jaiswal | Jul 09, 2026

विश्व कप में अर्जेंटीना और मिस्र के बीच खेले गए रोमांचक मुकाबले के बाद रेफरी के फैसलों को लेकर शुरू हुआ विवाद अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। मिस्र फुटबॉल संघ और टीम प्रबंधन की ओर से लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच अब अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। फीफा के रेफरी प्रमुख पियरलुइजी कोलिना ने मैच अधिकारियों का बचाव करते हुए कहा है कि विश्व कप के रेफरी पूरी तरह निष्पक्ष होते हैं और उन पर किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव नहीं होता है।

बता दें कि मिस्र फुटबॉल संघ ने इस मुकाबले में रेफरी रहे फ्रांस के फ्रांस्वा लेटेक्सियर और उनकी पूरी रेफरी टीम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संघ का आरोप है कि मैच के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले गलत लिए गए, जिनका सीधा असर मुकाबले के परिणाम पर पड़ा। इसी कारण रेफरी दल को प्रतियोगिता से हटाने की मांग भी की गई है।

गौरतलब है कि मिस्र के मुख्य कोच हुसाम हसन ने भी मैच के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने संकेत दिया कि कहीं न कहीं अर्जेंटीना को फायदा पहुंचाया गया। उनका कहना था कि शायद विश्व चैंपियन टीम को प्रतियोगिता में बनाए रखने की इच्छा रही हो। उनके इस बयान के बाद फुटबॉल जगत में बहस और तेज हो गई।

यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में अमेरिका के खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन पर लगाए गए एक मैच के निलंबन को हटाने के फैसले को लेकर भी फीफा सवालों के घेरे में रहा था। उस मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो से शिकायत की थी। इसके बाद बालोगुन पर लगाया गया प्रतिबंध हटा लिया गया था। इसी कारण कुछ लोगों ने मौजूदा विवाद को भी फीफा के फैसलों से जोड़कर देखा।

हालांकि फीफा के रेफरी प्रमुख पियरलुइजी कोलिना ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। फीफा की ओर से जारी बयान में उन्होंने कहा कि फुटबॉल में रेफरी के फैसलों पर रचनात्मक चर्चा होना स्वाभाविक है, लेकिन बिना किसी ठोस आधार के लगाए गए आरोप खेल की भावना के अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विश्व कप के रेफरी की ईमानदारी और निष्पक्षता पर सवाल उठाना उचित नहीं है, क्योंकि ऐसे आरोपों से रेफरी और उनके परिवारों को अनावश्यक धमकियों और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

कोलिना ने यह भी स्पष्ट किया कि फीफा की रेफरी व्यवस्था पर किसी व्यक्ति का प्रभाव नहीं पड़ सकता, चाहे वह स्वयं फीफा अध्यक्ष ही क्यों न हों। उनका कहना था कि मैच अधिकारियों के सभी फैसले केवल नियमों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिए जाते हैं।

मिस्र की सबसे बड़ी आपत्ति उस समय सामने आई थी जब टीम 1-0 से आगे थी और मरवान अटिया की भूमिका वाले आक्रमण के बाद किया गया दूसरा गोल वीडियो सहायक रेफरी की समीक्षा के बाद रद्द कर दिया गया। अधिकारियों ने माना कि अटिया ने आक्रमण की शुरुआत में अर्जेंटीना के खिलाड़ी लिसांद्रो मार्टिनेज के पैर पर कदम रखा था, जिसे नियमों के अनुसार फाउल माना गया। हालांकि इसके कुछ मिनट बाद मिस्र ने दूसरा गोल कर 2-0 की बढ़त बना ली थी।

इसके अलावा अतिरिक्त समय में अर्जेंटीना के विजयी गोल से पहले मिस्र ने दावा किया कि हामदी फाथी के साथ फाउल हुआ था। वहीं मोहम्मद सलाह ने भी जूलियन अल्वारेज की चुनौती के बाद पेनाल्टी की मांग की थी। लेकिन रेफरी ने खेल जारी रखा और कुछ ही देर बाद अर्जेंटीना ने निर्णायक गोल कर मुकाबला जीत लिया।

इन शिकायतों पर जवाब देते हुए पियरलुइजी कोलिना ने कहा कि उपलब्ध वीडियो में साफ दिखाई देता है कि मरवान अटिया ने लिसांद्रो मार्टिनेज के पैर पर कदम रखा था। उनके अनुसार नियम स्पष्ट हैं कि यदि किसी आक्रमण की शुरुआत में फाउल हुआ है और मैदान पर रेफरी उसे नहीं देख पाए हैं, तो वीडियो सहायक रेफरी हस्तक्षेप कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मोहम्मद सलाह और जूलियन अल्वारेज के बीच हुई टक्कर सामान्य खेल का हिस्सा थी और उसमें किसी प्रकार का फाउल नहीं पाया गया। इसलिए रेफरी और वीडियो सहायक रेफरी का फैसला पूरी तरह नियमों के हिसाब से माना गया है।

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