समाज के भले के लिए (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Jul 27, 2026

समाज का भला करने के लिए अच्छी बातें करना बेहतर योजनाएं बनाना बहुत ज़रूरी होता है। अच्छी बातें करने से शरीर में कोई कमी नहीं आती। योजनाएं बनाने से दिमाग का व्यायाम हो जाता है। खूब सारी अच्छी बातें करने से जीभ की कसरत हो जाती है। अच्छी बातें करते हुए, योजनाओं की घोषणा करने से माहौल में सकारात्मकता रहती है। कुछ लोग तालियां बजा दें तो उनके हाथों का व्यायाम भी हो जाता है। अच्छे माहौल में समाज के भले के लिए बैठक बहुत बढ़िया होती है। बैठक के बाद स्वादिष्ट खाना और पीना हो जाए तो लगता है समाज का भला हो गया।  समाज का भला चाहने वाले समाज सेवक, ख़ास पदभार संभालते हुए राष्ट्रीय राजनीतिक शैली में भाषण देते हैं । हर पद में भार अवश्य होता है जिसे संभालने के लिए आश्वासन, योजनाओं की घोषणा शक्ति प्रदान करती है। राष्ट्रीय परम्परा के अनुसार खूब सारे वायदे एक साथ करते हुए आत्मसम्मान महसूस होता है।   

यह अच्छी बात है कि पद भार संभालने के प्रभावशाली कार्यक्रम में टीम के दूसरे सदस्य भी अपने अपने पद का भार संभालते हैं। पिछले सत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया जाता है। सब मान लेते हैं कि किसी ने भी निकृष्ट कार्य नहीं किया होगा। सभी समझते हैं कि समाज सेवा ही सबसे उत्तम धर्म है। बैठक में घोषित आगामी कार्यक्रमों से पता चलता है कि हालांकि हमारे बच्चे भी नकली बुद्धि का प्रयोग करने लगे हैं लेकिन समाज से टीबी उन्मूलन नहीं हो पाया। खुद को विश्वगुरु समझते हैं लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में अनपढ़ता फैली हुई है।  दुनिया भर से लोग इलाज करवाने आते हैं लेकिन स्थानीय लोगों के लिए स्वास्थ्य व्यवस्थाएं हमेशा बीमार रहती हैं। त्योहारों की धरती का वातावरण और पर्यावरण दोनों उदास हैं। 

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उन्होंने घोषणा की कि अगले साल के लिए हमने ऐसा रोड मैप तैयार किया है कि संदर्भित क्षेत्रों में किए गए कार्यों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा और स्थाई प्रभाव छोड़ेगा। उन्होंने सचमुच आनंदित कर देने वाली घोषणाएं करते हुए कहा कि वे अपने शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए पूरा जोर लगा देंगे, सड़क सुरक्षा जागरूक अभियान चलाएंगे। शहर के पास से होकर बह रही नदी का जल ज्यादा प्रदूषित होता जा रहा है उसे स्वच्छ करने के लिए सभी नागरिकों के सहयोग से विशेष अभियान चलाएंगे ।

समाज के भले के लिए हुई बैठक में लगा कुछ दिनों में क्षेत्र में अनेक सकारात्मक बदलाव आने वाले हैं लेकिन बेचारी राजनीति तो उनसे परेशान हो जाएगी। जो लोग सुबह उठते ही ईष्ट के सामने प्रणाम कर, असामाजिक कारनामों में सफलता का आशीर्वाद लेते हैं उनका क्या होगा। 

समाज का भला चाहने वालों की सालाना बैठक बहुत मनोरंजक रही क्यूंकि खाना और सांस्कृतिक कार्यक्रम दोनों बहुत स्वादिष्ट रहे। दर्जनों व्यक्तियों को बहुत दिन बाद मिलने जुलने का मौका मिला। थकावट उतारू पेय का गिलास हाथ में थामे, व्यावसायिक गुफ्तगू करते रहे। महिलाएं, पारम्परिक और आधुनिक वस्त्रों में, साथ पहने गए  महंगे जेवरों सहित इतराती रही। यह उल्लेखनीय है कि इस दौरान भी उन्होंने समाज के भले के लिए बहुत सी बातें की । समाज के भले के लिए कुछ भी करना भला काम है।  

- संतोष उत्सुक

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