जांच समिति के सुझाव (व्यंग्य)

चोरी अब एक सम्मानजनक व्यवसाय भी है हालांकि कई पेशों में सम्मान, अपमानित हो चुका है। राजनीति को कभी देश और समाज की सेवा स्वीकारा जाता था लेकिन अब इसकी परिभाषा बदल कर नितांत व्यावसायिक हो गई है। चोरी के साथ साथ झूठ बोलना, मारना पीटना, जान लेना, सामान ज़मीन जेवर हथियाना सहयोगी व्यवसाय हैं।
चोरी अब एक सफल व्यवसाय हो गई है। इस क्षेत्र में काफी कुछ नया करने की संभावनाएं विकसित हो रही हैं। राजनीति की तरह, चोरी भी थोडा जोखिम भरा पेशा तो है मगर सफलता हासिल कर लो तो ज़िंदगी खुशनुमा हो जाती है। एक बार माल इक्कठा कर लो फिर चाहे कानून के साथ खेलना पड़े । दसियों साल निकल जाते हैं ज्यादा परेशानी नहीं होती। जुगाड़ हो जाए तो बुरा समय चम्पत रहता है। इस तरह की सफलताओं से उभरते चोर भी प्रेरित होते हैं और सुविधाओं भरे अवसरों का शुद्ध लाभ कमाना सीख जाते हैं।
चोरी अब एक सम्मानजनक व्यवसाय भी है हालांकि कई पेशों में सम्मान, अपमानित हो चुका है। राजनीति को कभी देश और समाज की सेवा स्वीकारा जाता था लेकिन अब इसकी परिभाषा बदल कर नितांत व्यावसायिक हो गई है। चोरी के साथ साथ झूठ बोलना, मारना पीटना, जान लेना, सामान ज़मीन जेवर हथियाना सहयोगी व्यवसाय हैं। चोरी का व्यवसाय कर रहे लोग अपने कौशल से सुरक्षा उपायों को हमेशा हराते आए हैं क्यूंकि अपना कर्तव्य जो पूरी ईमानदारी से निभाते हैं।
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चोरी के मामले की कई साल तक चलने वाली, गहन तप्तीश के बावजूद कुछ बरामद हो या न हो उपाय ज़रूर किए जाते हैं । सुझाव भी तो कई तरह के उपाए ही होते हैं। कम भण्डारण क्षमता वाले घटिया सीसीटीवी बेहोश पड़े होते हैं और मरम्मत लायक भी नहीं रहते। यह तो जब चोरी या दूसरी गड़बड़ करने वालों के ग्रह खराब स्थिति में आते हैं तभी पता चलता है। ऐसे मामलों में सबसे पहला ज़रूरी उपाय जांच होता है। एक बंदा तो ऐसे मामलों की जांच भी नहीं कर पाता इसलिए कई बार तीन समितियां बनानी पड़ती हैं तब जांच तेज़ी से हो पाती है। कई दर्जन पृष्ठों में विस्तार से बनी रिपोर्ट पढनी आसान और समझनी मुश्किल होती है तभी उसके लिए बुद्धिमान व्यक्ति अलग से लगाए जाते हैं।
जांच समिति उपदेश देती है कि सबसे पहले नोट गिनने वालों के लिए ड्रेस कोड लागू किया जाए। मतलब एक जैसे रंग, एक जैसे डिजाईन के कपड़े हों। कपड़ा बनाने वाली कम्पनी एक हो। एक ही दुकान से कपड़ा लिया जाए। यह ड्रेस जेब रहित हो यानी जब वर्दी में जेब नहीं होगी तो हेरा फेरी नहीं हो सकती। पहले नोट तहकर जेब में आराम से रखकर ले जाते होंगे। यह ड्रेस कर्मचारियों को ईमानदार बने रहने के लिए प्रेरित करेगी। दूसरा उपदेश यह आया कि मोबाइल और पर्स वगैरा बाहर रखा जाए। श्रद्धालु ज्यादा पुण्य कमाने के लिए नोट गणना में शामिल हो सकते हैं उन्हें भी कर्मचारियों की तरह करना होगा। बच्चे इस पुण्य कार्य में शामिल नहीं हो सकते। नामी कम्पनी, बढ़िया क्वालिटी, उच्च तकनीकी दक्षता वाले, ईमानदारी से खरीदे गए कैमरे कार्य स्थल के कोने कोने में लगा दिए जाएं। अतिरिक्त कर्मचारी भी लगाए जाएं।
नोट पात्रों को उठाकर ले जाने, पैसा निकालने, नोटों की गड्डियां बनाने और बैंक कर्मचारियों को सौंपने तक की गतिविधि को सीसीटीवी में लगातार देखकर रिकार्ड रखा जाए ताकि सनद रहे और बुरे वक़्त में काम आए। ज़िम्मेदार उच्च अधिकारी दक्षता से अपना मोर्चा स्थापित करेंगे और स्वाभाविक है उधर चोरी करने वाले भी अपनी नई स्किल विकसित कर रहे होंगे और नए कार्यक्षेत्र भी आजमाएंगे। यह तो समय को पता है कि जांच समिति के कौन कौन से सुझाव किस सीमा तक कितने कार्यन्वित होंगे । कुछ भी हो जी, जब जांच समिति के सुझावों का मौसम आता है तो अच्छा लगता है। ऐसा लगता है कुछ सकारात्मक होने के बेहतर दिन आ गए।
- संतोष उत्सुक
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