'दुनिया में बढ़ी भारत की ताकत', राहुल पर बोले विदेश मंत्री- देश की राजनीति को बाहर ले जाना गलत

By अंकित सिंह | Jun 08, 2023

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के 9 साल पूरे होने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा हमें एक विकास भागीदार के रूप में देखता है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री ने कहा कि आज लोग भारत को सुनना चाहते हैं और उन्हें लगता है कि भारत के साथ काम करने से उनका प्रभाव भी तेज होगा। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान बहुत से देशों ने अपने नागरिकों को उनके हाल पर छोड़ दिया था। हम कोविड के दौरान फंसे हुए कम से कम 70 लाख लोगों को वापस लाए। 

भारत का बढ़ा प्रभाव

विदेश मंत्री ने कहा कि हम बाहर जाते हैं और भारत की ओर से लोगों से मिलते हैं। हम समाज के विभिन्न क्षेत्र के लोगों से मिलते हैं। दुनिया, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ, भारत को एक विकास के भागीदार के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा हमें एक विकास भागीदार के रूप में देखता है, न केवल एक विकास भागीदार के रूप में बल्कि एक विकास भागीदार के रूप में जो प्रधानमंत्री द्वारा कही गई बातों पर खरा उतरता है। इसके साथ ही उन्होंनो दावा किया कि हम अपने पार्टनर के साथ वो काम करते हैं जो उनकी प्राथमिकता होती है...आज भारत की दूसरी छवि एक आर्थिक सहयोगी की है। 

भारत को सुनना चाहते हैं लोग

जयशंकर ने कहा कि आज लोग भारत को सुनना चाहते हैं और उन्हें लगता है कि भारत के साथ काम करने से उनका प्रभाव भी तेज होगा। आज हम जो प्रभाव डाल रहे हैं, उससे हमारी परंपरा का उत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम पहले जी20 अध्यक्ष हैं जिन्होंने अन्य लोगों से परामर्श करने का प्रयास किया और 125 देशों ने प्रतिक्रिया दी क्योंकि उन्हें हम पर भरोसा है। विदेश मंत्री ने कहा कि कोविड के दौरान बहुत से देशों ने अपने नागरिकों को उनके हाल पर छोड़ दिया था। हम कोविड के दौरान फंसे हुए कम से कम 70 लाख लोगों को वापस लाए। 

किसी दबाव में नहीं आता भारत

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल रहा है, जिसे दुनिया ने भी माना है। जयशंकर ने उत्तरी सीमा पर स्थिति और ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल के खिलाफ देश के रुख का हवाला देते हुए कहा कि भारत किसी दबाव में नहीं आता। 

 

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रूस-यूक्रेन युद्ध पर बयान

उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन के युद्ध का अलग-अलग देशों पर अलग प्रभाव है। अब रूस और चीन या और किसी देश पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा वह वे खुद तय करेंगे। 1955 के बाद से विश्व में बहुत कुछ हुआ लेकिन हमारा और रूस का रिश्ता स्थिर रहा है क्योंकि दोनों देश यह समझते हैं कि दोनों बड़े यूरेशियन देश है और पूरे यूरेशिया की स्थिरता हमारे रिश्तों पर निर्भर है।

कनाडा मामले पर बड़ा बयान

पिछले कुछ समय से छात्रों का यह मामला आ रहा है, जिन्हें कनाडाई कहते हैं कि वे उस कॉलेज में नहीं पढ़े, जिसमें उन्हें होना चाहिए था और जब उन्होंने वर्क परमिट के लिए आवेदन किया, तो वे मुश्किल में पड़ गए। शुरू से ही हमने इस मामले को उठाया है और हमारा कहना है कि छात्रों ने नेक नीयत से पढ़ाई की। अगर उन्हें गुमराह करने वाले लोग हैं तो दोषी पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। नेक नीयत से पढ़ाई करने वाले छात्र को सजा देना अनुचित है। मुझे लगता है कि कनाडाई भी स्वीकार करते हैं कि अगर किसी छात्र ने कोई गलती नहीं की है तो यह अनुचित होगा।

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