By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 25, 2026
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर में अबतक भारतीय शेयर बाजार से 48,056 करोड़ रुपये निकाले हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, महंगाई की चिंता और कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों के कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सिलसिला जारी है। हालांकि, पिछले सप्ताह के दौरान उनकी बिकवाली की रफ्तार में उल्लेखनीय कमी आई और दो कारोबारी सत्रों में वे शुद्ध खरीदार भी रहे।
यह वर्ष 2025 के पूरे साल में निकाली गई 1.66 लाख करोड़ रुपये की राशि से काफी अधिक है। चॉइस वेल्थ के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौड़ ने कहा कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया तनाव, कंपनियों के कमजोर नतीजे, महंगाई की आशंकाएं और घरेलू बाजार में नकदी की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता प्रमुख कारण हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
उन्होंने कहा कि 30,213 करोड़ रुपये के जियो प्लेटफॉर्म्स के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) ने भी अस्थायी रूप से बाजार की नकदी को कम किया। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर निवेशकों द्वारा पोर्टफोलियो में बदलाव ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि 23 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आने के पीछे अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल में गिरावट, रुपये में मजबूती और आकर्षक शेयर मूल्यांकन जैसे कारक रहे।
अमेरिका में 10 साल के बॉण्ड पर प्रतिफल 5.36 प्रतिशत से घटकर करीब पांच प्रतिशत पर आ गया, जबकि रुपया मजबूत होकर 94.94 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। खासतौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों का मूल्यांकन निवेशकों को आकर्षक लगा। निवेश मंच ‘ट्रैक’ के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वेदांत गुप्ते ने कहा कि विदेशी निवेशकों की निकासी का आंकड़ा पहली नजर में जितना चिंताजनक दिखाई देता है, स्थिति उतनी गंभीर नहीं भी हो सकती है।
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी पहले ही कई साल के निचले स्तर पर आ चुकी है, जबकि घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि आईपीओ के जरिये विदेशी निवेशकों का निवेश जारी रहना इस बात का संकेत हो सकता है कि वे भारतीय बाजार से पूरी तरह दूरी नहीं बना रहे हैं, बल्कि मौजूदा निवेश से पैसा निकालकर दूसरे अवसरों की ओर रुख कर रहे हैं। इस बीच, विदेशी निवेशक अक्टूबर में भारतीय ऋण या बॉण्ड बाजार में भी शुद्ध बिकवाल रहे।
उन्होंने पूर्ण सुलभ मार्ग (एफएआर) के तहत 3,858 करोड़ रुपये और स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) के तहत 1,332 करोड़ रुपये की निकासी की। हालांकि, सामान्य मार्ग के जरिये उन्होंने 3,737 करोड़ रुपये का निवेश किया।