Chirag Paswan Birthday: फिल्मी दुनिया से राजनीतिक शिखर तक, बिहार की सियासत के धुरंधर बने चिराग पासवान

By अनन्या मिश्रा | Oct 31, 2025

फिल्मी दुनिया से अपने सफर की शुरूआत करने वाले चिराग पासवान अब अपने पिता रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत को संभाल रहे हैं। आज यानी की 31 अक्तूबर को चिराग पासवान अपना 43वां जन्मदिन मना रहे हैं। बता दें कि बिहार के सियासी पटल पर तेजी से उभरते राजनेताओं में चिराग पासवान का नाम शामिल है। उन्होंने बहुत कम समय में राजनीतिक गलियारों में अपनी पहचान बनाई है। चिराग पासवान की सियासत को सिर्फ इस बल पर नहीं आंका जा सकता है, कि वह रामविलास पासवान के पुत्र हैं। बल्कि उन्होंने राजनीति में अपनी योग्यता को कई बार साबित कर दिखाया है। वह वर्तमान समय में बिहार की सियासत के प्रभावशाली शख्सियतों में शामिल हैं। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर चिराग पासवान के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...


जन्म और परिवार

दिल्ली में 31 अक्तूबर 1982 को चिराग पासवान का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम रामविलास पासवान था, जोकि राजनीति का बड़ा नाम थे। चिराग ने अपनी शुरूआती शिक्षा दिल्ली से पूरी की और फिर यहीं से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। चिराग पासवान फिल्मों में अपना करियर बनाना चाहते थे। उन्होंने कई फिल्मों में अभिनेता की भूमिका भी निभाई, लेकिन फिल्मी दुनिया में चिराग को कोई खास सफलता हासिल नहीं हुई। जिसके बाद उन्होंने अपने पिता के साथ राजनीति में अपनी किस्मत आजमाई।


फिल्मी सफर

साल 2011 में चिराग पासवान ने अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ इंडस्ट्री में डेब्यू किया था। चिराग और कंगना ने फिल्म 'मिले ना मिले हम' में एक साथ काम किया। इस फिल्म में चिराग लीड रोल में नजर आए थे। लेकिन इस फिल्म को दर्शकों का खास रिस्पॉन्स नहीं मिला, जिस कारण यह फिल्म फ्लॉप हो गई। इस फिल्म में कंगना के अलावा सागरिका घाटे, कबीर बेदी, पूनम ढिल्लो और नीरू बाजवा भी नजर आई थीं।


सियासी सफर

पहली फिल्म फ्लॉप होने के बाद चिराग पासवान अपने पिता के साथ राजनीति में सक्रिय हो गए। साल 2014 में चिराग ने जमुई लोकसभा सीट से लोजपा टिकट पर चुनाव लड़ा। पहले चुनाव में ही चिराग पासवान को बड़ी जीत मिली। इस दौरान उन्होंने जमुई सीट से सुधांशु शेखर भास्कर को 85 हजार से अधिक वोटों से हराया था। वहीं साल 2019 में भी चिराग पासवान का जमुई सीट पर कब्जा कायम रहा।


पारिवारिक विवाद

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में रामविलास पासवान का निधन हो गया। जिसके बाद चिराग का अपने चाचा पशुपति कुमार पारस से मतभेद हो गया। वहीं 14 जून 2021 को चिराग पासवान की जगह पशुपति कुमार पारस ने खुद को लोकसभा में नेता के रूप में घोषित कर दिया। इसके बाद चिराग ने अपने चाचा समेत 5 बागी सांसदों को पार्टी विरोधी गतिविधि के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया था।


फिर साल 2024 के लोकसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) सुप्रीमो चिराग पासवान ने बड़ी जीत हासिल की। इस दौरान उन्होंने हाजीपुर लोकसभा सीट से 1.70 लाख वोटों से जीत हासिल की। पीएम मोदी कैबिनेट में मंत्री के रूप में चिराग पासवान ने शपथ ली। राजनीति के अलावा चिराग समाज के लिए भी काम करते हैं। वह अपने नाम से एक NGO का संचालन करते हैं, जिसका नाम 'चिराग का रोजगार' है। जोकि बिहार के बेरोजगार युवाओं को रोजगार प्रदान करने का काम करता है। 

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