अमन की आशा से ब्रह्मोस की भाषा तक...4 दिन में कैसे चित हुआ पाकिस्तान?

By अभिनय आकाश | May 12, 2025

एक तरफ एलओसी पर मुनीर की सेना को मुंह की खानी पड़ी तो दूसरी तरफ बलूचिस्तान में बीएलए मजबूती के साथ पाकिस्तानी आर्मी को चुनौती दे रहे हैं। हाल ये है कि अब इस इलाके में मुनीर की सेना को बलूच आर्मी ने हमला तेज कर दिया है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या अब बलूचिस्तान में भी मुनीर की आर्मी को मुंह की खानी पड़ेगी? इधर पाकिस्तान बेशर्मी पर उतर आया है। सीजफायर को ही अपनी जीत बता रहा है। लेकिन ये सीजफायर नहीं बल्कि मुनरी सेना का एक तरह से सरेंडर है क्योंकि मुनीर ये जानते थे कि अगर सीजफायर नहीं होगा तो उसका अंजाम क्या होगा। अब ऐसे में आपको पाकिस्तान के सरेंडर की वजह बताते हैं। 

भारत ने पहलगाम का बदला लिया और पाकिस्तान में घुसकर आतंक के नौ ठिकानों को मटियामेट कर दिया। जिससे शहबाज और मुनीर घबरा गए। सिंधु जल संधि खत्म होने के बाद पाकिस्तान पहले से ही पानी के लिए मोहताज हो रहा था। उधर अटारी बॉर्डर बंद होने की वजह से कंगाल पाकिस्तान  का हर तरह का व्यापार भी बंद हो गया था। जब हिंद की सेना का जबरदस्त एक्शन सामने आया तो पाकिस्तान में डर का माहौल बन गया। मुनीर को भी ये समझ में आया कि भारत से जीतना तो मुश्किल है और जब भारत ने एक्ट ऑफ वॉर का ऐलान किया तो पाकिस्तान ने सरेंडर करना ही उचित समझा। 

500 किमी भीतर तक एयर स्ट्राइक कर दी 

ऑपरेशन सिंदूर के तहत एटमी हथियारों से लैस भारत-पाकिस्तान के बीच जंग में वॉरफेयर के कई तरीके पहली बार सामने आए। भारतीय सेना ने 21वीं सदी में पहली बार पाक के भीतर 500 किमी तक एयरस्ट्राइक की। नौसेना भी लगातार सी-कवर देती रही। आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर भारत ने 100 से ज़्यादा आतंकवादियों को मार गिराया, जिनमें IC-814 अपहरण और 2019 में पुलवामा आतंकी हमले में शामिल आतंकवादी भी शामिल थे। यहाँ तक कि जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अज़हर ने भी दावा किया कि सैन्य हमलों में उसके परिवार के 10 सदस्य मारे गए। जैसा कि सैन्य अभियानों के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने 11 मई को एक प्रेस वार्ता में कहा, उन नौ आतंकी ठिकानों पर किए गए हमलों में 100 से ज़्यादा आतंकवादी मारे गए, जिनमें यूसुफ़ अज़हर, अब्दुल मलिक रऊफ़ और मुदासिर अहमद जैसे उच्च मूल्य के लक्ष्य शामिल थे, जो IC-814 के अपहरण और पुलवामा विस्फोट में शामिल थे।

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90% से ज्यादा सफल स्ट्राइक 

भारत ने पहली बार ऑपरेशन सिंदूर में बड़ी संख्या में ड्रोन अटैक को अंजाम दिया। इनमें नागास्त्र-1 और स्काईस्ट्राइकर ड्रोन का इस्तेमाल किया। ये ड्रोन सेल्फ डिस्ट्रक्टिंग और अटैक वॉरफेयर वाले थे। यानी ये टारगेट पर जाकर हिट करने में सक्षम थे। 

पाक के पंजाब में 24 साल बाद पहला हमला 

भारत ने 1971 युद्ध के बाद पहली बार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भीतर तक बड़ी स्ट्राइक की। इसमें मुरीदके, रफीकी, सियालकोट और सुक्कर जैसी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की आर्मी साइट हैं। वहीं, सरगोधा व जेकोबाबाद के आर्मी कैंट भी दहल गए। 

4 दिन में ही विराम लगा 

ये पहली बार है जब भारत ने (4 दिन) लड़ाई में पाकिस्तान की रीढ़ तोड़ दी। 1965 49 दिन, 1971 की लड़ाई 13 दिन व करगिल युद्ध 85 दिन चला। इस दौरान पाक के 9 आतंकी ठिकाने, 11 सैन्य ठिकाने तबाह किए। इस प्रतिरोध के लिए भारत ने अपने शास्त्रागार में मौजूद घातक हथियारों का इस्तेमाल किया. इन हथियारों में न सिर्फ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल शामिल थे।

पाक ने पहली बार चीनी जेट उतारे 

इस तनाव के बीच पाकिस्तान और चीन का नापाक गठजोड़ भी बेनकाब हो गया। पाकिस्तान ने पहली बार भारत के खिलाफ युद्ध में चीन से मिले जे-सीरीज के थंडर जेट का इस्तेमाल किया। यही नहीं, पाक ने चीन के रॉकेट लॉन्चर से गोले भी दागे।

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हिंद का दुनिया को संदेश

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की रणनीति में एक सैद्धांतिक बदलाव का भी संकेत दिया है, जिससे यह स्थापित हुआ है कि राज्य प्रायोजित आतंकवाद अब लक्षित, दृश्यमान और आनुपातिक प्रतिशोध को आमंत्रित करेगा। जैसा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बयान में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारत की राजनीतिक, सामाजिक और रणनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक थी। आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह नया भारत सीमा के दोनों ओर आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करेगा। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए यह भी दिखाया कि वह आतंकवाद को कभी भी, कहीं भी दंडित करेगा। इसने दिखाया कि आतंकवादियों और उनके आकाओं के पास छिपने की कोई जगह नहीं है। 

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