By अभिनय आकाश | Sep 29, 2026
दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें रेड बुल को अपने प्रोडक्ट्स के लिए "एनर्जी ड्रिंक" शब्द का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह निर्देश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया था। जस्टिस अमित महाजन ने रेड बुल की याचिका को इस आधार पर मंज़ूरी दी कि खाद्य नियामक ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया था। कोर्ट ने गौर किया कि 30 जून, 2026 का वह आदेश, जिसमें रेड बुल को "एनर्जी ड्रिंक" शब्द का इस्तेमाल न करने का निर्देश दिया गया था, कंपनी को जवाब दाखिल करने या स्पष्टीकरण देने का मौका दिए बिना ही जारी कर दिया गया था। इसके बाद कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया, लेकिन यह साफ़ किया कि FSSAI इस मामले पर दोबारा विचार कर सकता है और कानून की सही प्रक्रिया का पालन करने के बाद नया फ़ैसला ले सकता है। FSSAI को रेड बुल को 'शो-कॉज़ नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) जारी करने और कोई भी नया आदेश देने से पहले कंपनी को अपनी बात रखने का मौका देने की इजाज़त दी गई है।
याचिका के अनुसार, इस एडवाइज़री में कैफीन वाले ड्रिंक्स की कैटेगरी में आने वाले प्रोडक्ट्स के लिए "एनर्जी ड्रिंक" शब्द के इस्तेमाल की इजाज़त दी गई थी। रेड बुल ने अप्रैल 2024 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस रिलीज़ का भी ज़िक्र किया। साथ ही, कंपनी ने उन लाइसेंस, इंपोर्ट मंज़ूरी और 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' का भी हवाला दिया जो पिछले कुछ सालों में इसी नाम वाले उसके प्रोडक्ट्स के लिए जारी किए गए थे। कंपनी का तर्क था कि बाद में दिए गए निर्देश को सही ठहराने के लिए कानून, नियमों या वैज्ञानिक परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। कंपनी ने FSSAI की कार्रवाई को 'नैचुरल जस्टिस' (प्राकृतिक न्याय) के उल्लंघन जैसे आधारों पर भी चुनौती दी। उसका तर्क था कि अपने प्रोडक्ट्स पर असर डालने वाला कोई भी फ़ैसला लेने से पहले रेगुलेटर को कंपनी का पक्ष सुनना चाहिए था। हाई कोर्ट के आदेश के बाद FSSAI के पास यह विकल्प है कि वह रेड बुल को नोटिस जारी करे और उसका जवाब सुनने के बाद इस मामले पर नए सिरे से विचार करे।