By अंकित सिंह | Jun 24, 2025
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भाषा के वित्तपोषण में कथित पक्षपात को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की और उस पर तमिल और अन्य दक्षिण भारतीय भाषाओं की उपेक्षा करते हुए संस्कृत को तरजीह देने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में स्टालिन ने लिखा, "संस्कृत को करोड़ों मिलते हैं; तमिल और अन्य दक्षिण भारतीय भाषाओं को मगरमच्छ के आंसू के अलावा कुछ नहीं मिलता। तमिल के लिए झूठा लगाव; सारा पैसा संस्कृत के लिए!"
रिपोर्ट के अनुसार, तमिल, जिसे 2004 में शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया था, को भारतीय भाषाओं के प्रोत्साहन के लिए अनुदान योजना के तहत 113.48 करोड़ रुपये मिले - जो संस्कृत से 22 गुना कम है। तेलुगु और कन्नड़ को संस्कृत पर खर्च किए गए धन का 0.5 प्रतिशत से भी कम मिला, जबकि मलयालम और ओडिया को 0.2 प्रतिशत से भी कम मिला। स्टालिन का बयान द्रविड़ पार्टियों के बीच लंबे समय से चली आ रही चिंता को दर्शाता है कि संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए दक्षिणी राज्यों, विशेष रूप से तमिलनाडु की सांस्कृतिक और भाषाई प्राथमिकताओं को दरकिनार किया जा रहा है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारतीय विरासत और हिंदू धार्मिक परंपरा से जुड़ी है।