By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 30, 2026
विश्व की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (जी20) के शीर्ष राजनयिक अटलांटा में बैठक कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एवं व्यापार को खतरा पैदा करने वाले कई युद्धों और अन्य वैश्विक संकट पर उनके बीच गहरे मतभेद नजर आ रहे हैं। इन राजनयिकों में चीन और रूस के राजनयिक भी शामिल हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो शुक्रवार और शनिवार को होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं, जो दिसंबर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उनके मियामी गोल्फ क्लब में आयोजित होने वाले जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तैयार करेगी।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस बैठक में उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता पोत परिवहन से जुड़े मुद्दों पर मतभेदों को सुलझाना है। इसमें मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर, काला सागर और दक्षिण चीन सागर से जुड़े मामले शामिल हैं। इसके अलावा, ईरान, रूस-यूक्रेन, और चीन तथा उसके छोटे पड़ोसी देशों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी।
लेकिन इस बैठक पर ईरान में अमेरिका के नये सिरे से हमले करने का साया मंडरा रहा है, जिसने जी20 के सदस्य सऊदी अरब सहित पूरे क्षेत्र को तनावपूर्ण स्थिति में डाल दिया है। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने पश्चिम एशिया के कई देशों और क्षेत्रीय सहयोगियों से कहा है कि वे मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर संभावित नये सैन्य हमलों के लिए तैयार रहें, और इस बात के लिए भी सतर्क रहें कि ईरान इसका जवाब दे सकता है। कुछ जी20 देशों ने अमेरिका द्वारा रूस को आमंत्रित किये जाने पर चिंजा जताई है, जबकि रूस यूक्रेन पर लगातार हमले कर रहा है।
अमेरिका के अधिकारियों के अनुसार, रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव अटलांटा में शामिल होंगे। चीन की तरफ से उप-विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे, लेकिन बाकी ज़्यादातर देशों ने अपने शीर्ष राजनयिकों को भेजा है। यह स्पष्ट नहीं है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन फ्लोरिडा में दिसंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन के लिए ट्रंप के निमंत्रण को स्वीकार करेंगे या नहीं।
हालांकि, यूरोप में अमेरिका के सहयोगी देश रूस की मौजूदगी को लेकर असहज हैं, खासकर इसलिए कि ट्रंप ने मॉस्को पर नये प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया और साजोसामान तथा खुफिया सहायता को अस्थायी रूप से सीमित कर दिया, जिससे यूक्रेन के साथ संबंध अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। रूस के विदेश मंत्रालय ने अपने प्रतिनिधिमंडल के लिए वीज़ा हासिल करने में आ रही दिक्कतों की शिकायत की, जो बिल्कुल आखिरी समय पर जाकर सुलझ पाई। मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा कि इन मुश्किलों से ऐसा लगा कि “वाशिंगटन में हर कोई” लावरोव के वहां आने से खुश नहीं है।
उन्होंने कहा कि लावरोव इस बैठक का इस्तेमाल “वैश्विक आर्थिक संस्थानों में जल्द सुधार” की वकालत करने और “बहुध्रुवीय विश्व” के रूस के दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए करेंगे। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जॉर्जिया में अमेरिकी राजदूत रहे इयान केली के अनुसार, कई रिपब्लिकन सांसद, जिन्हें पहले से ही संसद में पार्टी का बहुमत खोने का डर सता रहा है, पुतिन के प्रति ट्रंप के नरम रुख से नाराज़ हैं। केली ने कहा कि जी20 के संदर्भ में, लावरोव की मौजूदगी से रूस-यूक्रेन युद्ध पर एक साझा रुख बनाने की कोशिशों को निश्चित रूप से नुकसान पहुंचेगा।
उन्होंने कहा, इससे उस संदेश का असर जरूर कम हो जाएगा, जिसे कम से कम पश्चिमी सदस्य देश पहुंचाना चाहते हैं। दक्षिण अफ्रीका ने शुक्रवार को कहा कि बैठकों में उसकी अनुपस्थिति स्वेच्छा से नहीं थी।