MEA Briefing: Balochistan Independence, Russian Oil Purchase, Doval Sergio Gor Meeting, China, Nepal, Bangladesh और Pakistan संबंधी मुद्दों पर आया India का जवाब

Randhir Jaiswal
ANI

अरुणाचल प्रदेश पर चीन की प्रतिक्रिया से जुड़े सवाल पर रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अविभाज्य और अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा तथ्य है जो स्वयं स्पष्ट है और कोई भी परिस्थिति इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती।

भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस वार्ता में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने विभिन्न मुद्दों पर आधारित सवालों के जवाब देते हुए भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों से जुड़े कई अहम मसलों पर स्पष्ट रुख सामने रखा। चीन के साथ सीमा विवाद से लेकर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POJK), अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता, बांग्लादेश के साथ संबंध, पश्चिम एशिया की स्थिति, रूस से तेल खरीद और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों तक, भारत ने कई मोर्चों पर अपनी स्थिति दोहराई और कुछ मामलों में पाकिस्तान तथा चीन को सख्त संदेश भी दिया।

अरुणाचल प्रदेश पर चीन की प्रतिक्रिया से जुड़े सवाल पर रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अविभाज्य और अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा तथ्य है जो स्वयं स्पष्ट है और कोई भी परिस्थिति इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती।

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चीन के साथ सीमा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर भारत की स्थिति बताते हुए जायसवाल ने कहा कि बातचीत के दौरान भारत लगातार यह रेखांकित करता रहा है कि सीमा से जुड़े विषय बेहद गंभीर हैं और इन इलाकों में शांति तथा स्थिरता बनाए रखना सर्वोच्च महत्व रखता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि सीमा पर पैदा होने वाली स्थिति का सीधा असर दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा।

साथ ही बांग्लादेश को लेकर विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत के उच्चायुक्त ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री रहमान से मुलाकात की। दोनों के बीच आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। जायसवाल ने कहा कि भारत की ओर से बांग्लादेश को द्विपक्षीय यात्रा के लिए आमंत्रण दिया गया है। इसके अलावा दिल्ली में होने वाले BRICS आउटरीच सत्र में भी भाग लेने का निमंत्रण दिया गया है। इस संबंध में आगे की जानकारी समय-समय पर साझा की जाएगी।

बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री के प्रत्यर्पण से जुड़े सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का रुख पहले से स्पष्ट है और मामले को भारत में लागू स्थापित प्रक्रियाओं के अनुरूप देखा जा रहा है। वहीं हादी से जुड़े मामले को जायसवाल ने कानूनी विषय बताते हुए कहा कि इसकी जांच अभी जारी है।

इसके अलावा, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हालिया घटनाक्रम पर भारत ने पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर तीखा रुख अपनाया। जायसवाल ने कहा कि भारत घटनाक्रम पर लगातार करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में POK में जिस तरह मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है, वह गंभीर चिंता का विषय है। हिंसा में लोगों की मौत ने एक बार फिर यह उजागर किया है कि मानवाधिकारों की रक्षा के मामले में पाकिस्तान को अभी बहुत कुछ करना बाकी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को हालिया हिंसा में हुई बड़ी संख्या में मौतों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की।

बलूचिस्तान के सवाल पर भी जायसवाल ने पाकिस्तान के खिलाफ गंभीर आरोपों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चुनावों के दौरान और उससे पहले बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। जायसवाल ने कहा कि जनता के असंतोष का जवाब गोलियों, ब्लैकआउट, दमन और उत्पीड़न से दिया गया। उन्होंने कहा कि 90 से अधिक लोग मारे गए और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। भारत ने इसे गंभीर और बड़े पैमाने पर हुए मानवाधिकार उल्लंघन के रूप में रेखांकित किया।

वहीं अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से जुड़े सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बीच लगातार दो दिनों में बैठकें हुईं। जायसवाल ने बताया कि पहली बैठक कल और दूसरी आज हुई। दोनों बैठकों में भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति हो रही है और दोनों पक्ष इसे और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। व्यापार के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण तकनीकी एवं रणनीतिक क्षेत्रों और अन्य सहयोगी क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने पर जोर है।

इसके अलावा, सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौते को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत इस समझौते के प्रभावों की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता, दोनों दृष्टिकोणों से समीक्षा कर रहा है। जायसवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों पर भारत करीबी नजर बनाए हुए है। इस समझौते के संभावित प्रभावों का आकलन किया जा रहा है और भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

साथ ही रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत ने अपनी ऊर्जा नीति का आधार स्पष्ट किया। जायसवाल ने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी एक स्रोत पर निर्भर रहने की बजाय ऊर्जा स्रोतों में विविधता बनाए रखना चाहता है। यानी भारत का जोर अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा हासिल कर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने पर है।

विदेश मंत्रालय ने अपनी नई संचार व्यवस्था के उद्देश्य पर भी बात की। जायसवाल ने कहा कि भारत ऐसी प्रभावी संचार नीति चाहता है, जिसके जरिए देश की आबादी के हर वर्ग तक जानकारी पहुंचाई जा सके। हाल में शुरू किए गए स्नैप चैट तंत्र का केंद्रीय उद्देश्य इसी दिशा में काम करना है।

इसके अलावा, स्लोवेनिया में हुई घटना को लेकर पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने घटना की कड़ी निंदा की है और इस मुद्दे को स्लोवेनिया की सरकार के समक्ष भी उठाया है।

साथ ही भारत ने एक बार फिर अपनी ‘Neighborhood First’ नीति को विदेश नीति की प्राथमिकताओं में बताया। जायसवाल ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। विदेश सचिव की भूटान और श्रीलंका यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों दौरों से संबंधित विस्तृत जानकारी पहले ही साझा की जा चुकी है। भारत का उद्देश्य पड़ोसी देशों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और संबंधों को और गहरा करना है।

नेपाल संबंधी प्रभासाक्षी के प्रश्न पर भारत ने कहा कि दोनों देशों के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। जायसवाल ने माना कि कुछ ऐसे मुद्दे हो सकते हैं जिन पर अभी सहमति नहीं बन पाई है, लेकिन इन मुद्दों के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत का स्थापित ढांचा मौजूद है। उन्होंने कहा कि इसी व्यवस्था के तहत भारत और नेपाल एक-दूसरे के साथ बैठकर संबंधित मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।

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