By Ankit Jaiswal | Aug 02, 2026
गाजा में संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। युद्धविराम और शांति की नई पहल की चर्चाओं के बीच भी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। रविवार को गाजा के विभिन्न इलाकों में हुए हवाई हमलों में कम से कम 17 फलस्तीनी नागरिकों की मौत होने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में पहले से जारी मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है।
स्वास्थ्य सूत्रों के अनुसार, गाजा शहर के पश्चिमी हिस्से में स्थित अल-सूसी टावर की एक आवासीय इमारत पर हुए हवाई हमले में अब्दुल्ला अबू तैफ, उनकी गर्भवती पत्नी अबीर अनान और उनके पांच वर्षीय बेटे अज़्जाम की मौत हो गई। वहीं खान यूनिस के उत्तर-पश्चिम स्थित अल-करारा इलाके में एक मकान पर हुए हमले में अल-हम्स परिवार के तीन सदस्य, महमूद, उनकी पत्नी फातिमा और उनकी छोटी बेटी की जान चली गई। इस हमले में तीन अन्य लोग घायल भी हुए हैं।
बता दें कि मध्य गाजा के दीर अल-बलह क्षेत्र में भी एक घर पर हमले में कामू अबू मुआइलिक और उनकी पत्नी हुडा की मौत हो गई। इसी इलाके में मोटरसाइकिल पर जा रहे दो भाइयों की भी हमले में जान चली गई। वहीं उत्तरी गाजा के जबालिया शरणार्थी शिविर में एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि की गई है।
गौरतलब है कि बाद में गाजा शहर के रेमाल इलाके में विस्थापित लोगों के एक तंबू पर कथित रूप से ड्रोन हमला हुआ, जिसमें एक बच्चे सहित दो लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा गाजा शहर में एक वाहन पर हुए हमले में चार अन्य लोगों के मारे जाने की भी सूचना है। फलस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि पिछले कई सप्ताहों में यह एक दिन में हुई सबसे अधिक मौतों वाली घटनाओं में से एक है।
इससे पहले शनिवार को दीर अल-बलह स्थित अल-अक्सा शहीद अस्पताल से जुड़े दवा भंडार पर भी हमला हुआ था। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के महानिदेशक मुनीर अल-बुर्श ने आरोप लगाया कि दवाओं और चिकित्सा सामग्री को निशाना बनाए जाने से स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। उनके अनुसार, दो चिकित्सा सुविधाएं पूरी तरह नष्ट हो गईं जबकि दो अन्य को भारी नुकसान पहुंचा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, घटनास्थल पर मौजूद पत्रकारों ने बताया कि हमले से कुछ ही मिनट पहले लोगों को क्षेत्र खाली करने का निर्देश दिया गया था। विस्फोट के कारण बड़ी संख्या में विस्थापित लोगों के तंबू क्षतिग्रस्त हो गए, जिसके बाद कई परिवारों को दोबारा सुरक्षित स्थानों की तलाश में जाना पड़ा।
दूसरी ओर, इजराइली सेना का कहना है कि जिन स्थानों पर कार्रवाई की गई, वहां हमास या अन्य सशस्त्र संगठनों से जुड़े लोग मौजूद थे। हालांकि स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है। फलस्तीनी पक्ष का आरोप है कि रिहायशी इमारतों और आम नागरिकों को निशाना बनाया गया, जबकि इजराइल का कहना है कि उसकी कार्रवाई सुरक्षा जरूरतों के तहत की गई है।