Gen Alpha Protest Bhopal | भोपाल में 'जेन अल्फा' का हल्लाबोल! KVS में विलय के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरे रीजनल स्कूल (DMS) के छात्र

By रेनू तिवारी | Aug 19, 2026

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 'जेन अल्फा' (Gen Alpha) के छात्रों का एक अनोखा और उग्र विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पस स्कूल (DMS), जिसे आमतौर पर रीजनल स्कूल के नाम से जाना जाता है, के छात्रों ने केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में अपने स्कूल के प्रस्तावित विलय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्रों ने स्कूल परिसर के बाहर जमकर नारेबाजी की और फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की।

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विरोध कर रहे छात्रों ने कहा कि डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पस स्कूल, जिन्हें रीजनल स्कूल भी कहा जाता है, दिसंबर 1965 से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के तहत काम कर रहे हैं। ऐसे प्रायोगिक स्कूल चार शहरों—भोपाल, अजमेर, मैसूर और भुवनेश्वर—में स्थापित किए गए थे, जिनका उद्देश्य शिक्षण के नए तरीके विकसित करना और शिक्षा के नए तरीकों पर प्रयोग करना था।

स्कूल से जुड़े छात्रों और सदस्यों ने कहा कि वे इन संस्थानों को KVS में मिलाने के प्रस्ताव का विरोध करते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि स्कूलों को एक अलग प्रशासनिक ढांचे के तहत लाने से उनकी खास पहचान और उन शैक्षणिक प्रयोगों पर असर पड़ सकता है, जिनके लिए उन्हें स्थापित किया गया था।

विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने नारे लगाए और साफ कर दिया कि वे विलय को स्वीकार नहीं करेंगे। बाद में उन्होंने रीजनल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर एस.के. गुप्ता को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें औपचारिक रूप से अपनी आपत्तियां और मांगें दर्ज कराईं।

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प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि फैसले को वापस लिया जाए और प्रायोगिक स्कूलों की मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखा जाए। उन्होंने कहा कि इसके बजाय इन संस्थानों को शैक्षिक नवाचार और अनुसंधान के केंद्रों के रूप में मजबूत किया जाना चाहिए।

छात्रों ने यह भी चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे चरणबद्ध तरीके से अपना विरोध तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के जरिए यह मुद्दा उठाते रहेंगे और अपनी चिंताओं को अधिकारियों और संबंधित विभागों तक पहुंचाएंगे।

यह विरोध भोपाल में प्रस्तावित विलय के खिलाफ विरोध की शुरुआत है, जिसमें छात्र इस बात पर जोर दे रहे हैं कि प्रायोगिक स्कूलों के पीछे की मूल सोच को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

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