By अनन्या मिश्रा | Sep 21, 2026
अधिकतर लोग अल्जाइमर को याददाश्त से जुड़े रोग की तरह देखते हैं। लेकिन यह एक गंभीर मनोभ्रंश या दिमागी विकार है, जिसके निदान के लिए अगर सही प्रयास नहीं किए जाते हैं, तो व्यक्ति के पूरे मानसिक सेहत की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 21 सितंबर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे मनाया जाता है। इस दिन अल्जाइमर के कारणों,जांच व निदान तथा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों के बारे में लोगों को जागरुक किया जाता है। तो आइए जानते हैं इस दिन का इतिहास, उद्देश्य और थीम आदि के बारे में...
21 सितंबर 1994 को संगठन की 10वीं वर्षगांठ के मौके पर संगठन द्वारा अल्जाइमर को लेकर जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 21 सितंबर को यह दिन मनाए जाने की घोषणा की गई थी। तब से हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। इस दौरान विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संगठनों द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
आमतौर पर सामान्य परिस्थितियों में याददाश्त की कमजोरी को अधिकतर लोग अधिक गंभीरता से नहीं लेते हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ ही यह समस्या भी बढ़ने लगती है। लोग इसको बुढ़ापे का लक्षण मानकर इग्नोर कर देते हैं। ऐसे में लक्षणों की जानकारी न होने पर लोग डॉक्टर की सलाह लेने में देर करते हैं। वहीं पिछले कुछ सालों में हर तरह के रोगों की तरह अल्जाइमर के मामलों में भी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।