By अभिनय आकाश | Jan 13, 2026
डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा की तरह एक बयान दिया नेटो इज नथिंग विदाउट यूएस। शायद कुछ साल पहले यह बात यूरोप चुपचाप सुन लेता। लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं। इस बार यूरोप ना सिर्फ नाराज है बल्कि खुलकर जवाब दे रहा और जवाब भी ऐसा जो अमेरिका के लिए खतरनाक संकेत है। फ्रांस की नेशनल असेंबली यानी वहां की लोकसभा उसकी वाइस प्रेसिडेंट क्लेमथ गुएट ने एक फॉर्मल पार्लियामेंट्री रेजोल्यूशन फेस कर दिया। रेजोल्यूशन का विषय बेहद सीधा और बेहद गंभीर था कि फ्रांस शुड बिगेन प्लानिंग इट्स विथड्रॉल नाटो इंटीग्रेटेड मिलिट्री कमांड। नाटो के उस सिस्टम से बाहर निकलने की बात है जहां अमेरिका का पूरा कंट्रोल है। नाटो का इंटीग्रेटेड मिलिट्री कमांड मतलब अमेरिका रणनीति बनाए अमेरिका आदेश दे और यूरोप फॉलो करें।
फ्रांस अब कह रहा अब तो बिल्कुल नहीं। फ्रांस का तर्क बहुत साफ है। रेजोल्यूशन में कहा गया है कि नाटो एक ऐसा मिलिट्री ब्लॉक बन चुका है जो अमेरिका के हित के लिए काम करता है। यूरोप की सुरक्षा से ज्यादा अमेरिका की राजनीति को प्राथमिकता देता है और यही फ्रांस को मंजूर नहीं है। ध्यान रखिए फ्रांस एक न्यूक्लियर पावर है। यूरोप की सबसे ताकतवर आर्मी फ्रांस के पास है। यूएनएससी का परमानेंट मेंबर भी है और ईयू की सबसे मजबूत मिलिट्री ताकतों में से एक है। अगर फ्रांस नाटो से दूरी बना लेता है तो यह अमेरिका के लिए सिंबॉलिक नहीं स्ट्रेटेजिक झटका होगा। इस रेजोल्यूशन में एक अहम बात ग्रीनलैंड है।
फ्रांस ने खुलकर कहा कि अमेरिका जिस तरह ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख दिखा रहा फ्रांस उसे सपोर्ट नहीं करता है। मतलब साफ है यूरोप अब अमेरिकी विस्तारवाद का बोझ नहीं उठाना चाहता है। यूरोपीय यूनियन की पार्लियामेंट्री में मेंबर्स ऑफ यूरोपियन पार्लियामेंट यानी कि एमईपीएस खुले तौर पर कह रहे हैं कि या तो यूएसयू ट्रेड डील को फ्रीज किया जाए या सस्पेंड किया जाए या फिर अमेरिका के खिलाफ काउंटर्स प्रतिबंध लगा दिए जाए। यह बात सिर्फ एक पार्टी नहीं कह रही।